क्या समय है…? परसाई के पुनर्मुल्यांकन का: आलेख (एम० एम० चंद्रा)

"इस बात को हम अच्छी तरह से जानते है की परसाई अपने युगबोध को साथ लेकर चल रहे थे. जब हम परसाई का मूल्यांकन करेंगे तो हमें वामपंथ के वैचारिक पक्ष पर भी बात करनी पड़ेगी, पार्टी संगठन और अपनी आलोचना और आत्मालोचना से ... Read More...

समय के झरोखे से हरिशंकर परसाई… आलेख

हरिशंकर परसाई केवल लेखक कभी नहीं रहे. वे लेखक के साथ-साथ एक्टिविस्ट भी थे. उनका समूचा जीवन आन्दोलनों और यूनियनों से जुड़ा रहा. आन्दोलन छात्रों के, श्रमिकों के, शिक्षकों के, लेखकों के भी. वे लेखक के रूप में अपनी... Read More...

मानसून सत्र की गलबहियां : व्यंग्य (एम्0 एम्0 चंद्रा)

व्यंग्य, वर्तमान राजनैतिक और सामाजिक स्थितियों पर रचनात्मक तरीके से बात करने का एक बेहतर माद्ध्य्म है .... और यदि व्यंग्य रचना एकदम ताज़ा हो तो रचनात्मक उर्जा पाठक को निश्चित ही आन्नदित करती है ऐसी ही ताजगी से ल... Read More...

बिना जूते ओलम्पिक पदक: व्यंग्य (एम० एम० चंद्रा)

"पूरी दुनिया में जूते फेंकने की परम्परा थोड़ी-सी नयी जरूर है, लेकिन समय, देश-काल के अनुसार यह अपने में परिवर्तन जरूर कर रही है . आज पूरी दुनिया में इसका प्रचलन बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है. जिसका प्रारम्भ अमेरिक... Read More...
harishankar-parsai1

क्या समय है…? परसाई के पुनर्मुल्यांकन का : आलेख (एम्0 एम्0 चंद्रा)

(“हरिशंकर परसाई:–चर्चा ज़ारी है……” के अंतिम और परसाई के जन्म दिन पर…….‘एम० एम० चंद्रा’  का आलेख’) “इस बात को हम अच्छी तरह से जानते है की परसाई अपने युगबोध को साथ लेकर चल रहे थे. जब हम परसाई का मूल्यांकन करेंगे ... Read More...
‘हरिशंकर परसाई’ से एक पत्र व्यवहार: (संकलन से)

‘हरिशंकर परसाई’ से एक पत्र व्यवहार: (संकलन से)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ….. ”  का दूसरा दिन ……..) २६ अगस्त,१९७३,  देशबन्धु,रायपुर, में प्रकाशित हुआ हरिशंकर परसाई के दोस्त  ‘मायाराम सुरजन’ का खुला पत्र | इसके प्रतिउत्तर में ‘हरिशंकर परसाई’ क... Read More...