अधिकार तो है, पर उनको आप उपयोग में नहीं ले सकते: (प्रो० अपूर्वानंद)

पिछले कुछ समय से अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे हमलों को रेखांकित करते हुए कई विद्वानों ने इस दौर को अघोषित आपातकाल की संज्ञा तक दे डाली,  इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का नाम अग्रणी है । कां... Read More...

सांझी संस्कृति की भाषा है, हिंदी और उर्दू- शायर शीन काफ़ निजाम, साक्षात्कार (मोहम्मद हुसैन डायर)

 सांझी संस्कृति की भाषा है, हिंदी और उर्दू मोहम्मद हुसैन डायर खड़ी बोली के दो रूप हैं, हिंदी और उर्दू। हिंदुस्तानी गंगा-जमुनी तहज़ीब को समझने के लिए खड़ी बोली के इन दोनों का ज्ञान बहुत आवश्यक है। भारत की साझ... Read More...

“आंचलिक सांस्कृतिक पहचान है क्षेत्रीय भाषा”, हरदान हर्ष (साक्षात्कार)

साहित्यकार हरदान हर्ष से मोहम्मद हुसैन डायर व ममता नारायण की बातचीत के अंश ........ "आंचलिक सांस्कृतिक पहचान है क्षेत्रीय भाषा", हरदान हर्ष मोहम्मद हुसैन डायर संविधान की आठवीं सूची में राजस्थानी भाषा को शाम... Read More...

हिंदी-उर्दू द्वंद्व और टोपी शुक्ला: आलेख (मोहम्मद हुसैन डायर)

राही मासूम रज़ा की कृतियों के पात्र भाषायी द्वंद्व से जूझते देखे जा सकते हैं। आधा गांव जहां उर्दू और आंचलिक भाषा  में उलझा हुआ है, वहीं टोपी शुक्ला हिंदी उर्दू विवाद पर लंबी बहस कर पाठकों को झकझोर देने वाले संवा... Read More...

सामाजिक परिवर्तन के अंतर्द्वंदऔर आधा गाँव: शोध आलेख

प्रयोगधर्मी साहित्यकार राही मासूम रजा़ ने अपनी लेखनी द्वारा बदलते सामाजिक परिवेश को बहुत ही सूक्ष्मता से शब्दबद्ध किया है। आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व सन् 1966 में लिखा गया ‘आधा गाँव’ उपन्यास राही की प्रतिनिधि रचना... Read More...

‘आधा गांव’ का सम्पूर्ण दृष्टा, ‘राही’ साक्षात्कार (एम् फीरोज खान)

उर्दू अदब से शुरू होकर हिंदी साहित्य में बड़ा दख़ल रखने वाले 'राही मासूम रज़ा' के व्यक्तित्व और जीवन संघर्षों का परिचायक खुद उनका विपुल साहित्य है बावजूद इसके आपका नाम और साहित्यिक रचनाएं हमेशा चर्चाओं में रहे ... Read More...