पश्चिमी नारीवाद की अवधारणा और विभिन्न नारीवादी आंदोलन :आलेख (डा0 नमिता सिंह)

"स्त्रियों की अंधेरी दुनियां में रोशनी के प्रवेश की, घर-परिवार की चारदीवारी के भीतर सामाजिक-धार्मिक बंधनों में जकड़ी स्त्री मुक्ति की कहानी लगभग अठारहवीं शताब्दी से ही शुरू हुई। विश्व के अलग-अलग देशों में यह बद... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आठवीं क़िस्त (नमिता सिंह)

1917 में ऐनी बेसेंट (जो होमरुल लीग की संस्थापकों में थी) उन्होंने मार्गेट कूजिंस, सरोजनी नायडू समेत अन्य अनेक कांग्रेसी महिलाओं के साथ स्त्रियों के वोट देने के अधिकार की मांग की। ऐनी बेसेंट का विचार था कि होमरु... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: सातवीं क़िस्त (नमिता सिंह)

योरोप के नवजागरण के विपरीत भारत में नयी चेतना और विचारों का परिदृश्य एकदम भिन्न था। प्रारंभिक अवस्था में यह समाज सुधार आंदोलन थे जिन्होंने बंदिनी अवस्था की भारतीय स्त्री के जीवन की त्रासदी को समझते हुए उन स्थित... Read More...

लोकतंत्र बचेगा तभी हम बचेंगे: (डॉ० नमिता सिंह)

ये समझा जाता रहा है कि पत्रकार जनता की धड़कन पहचानते हैं और उसे शब्द देते हैं। वे एक प्रकार से जनता के प्रतिनिधि बन कर सत्ता और समाज के बीच सेतु होते हैं और इसीलिये लोकतंत्र के तीन अंगों विधायिका, कार्यपालिका और... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान : आलेख ‘नवीं क़िस्त’ ( नमिता सिंह)

राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न कार्यक्रमों के नेतृत्व में हिन्दू स्त्रियों के अलावा मुस्लिम, पारसी और मार्गरेट कूजीन्स व ऐनी बेसेंट जैसी विदेशी महिलाएँ भी थीं।  राष्ट्रीय आंदोलन ने यह भी प्रमाणित किया कि महिलाओं क... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान : आलेख ‘दसवीं और अंतिम क़िस्त ( नमिता सिंह)

"1997 में सर्वोच्च न्यायालय ने भंवरी देवी केस के प्रकाश में कामकाजी महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने हेतु कार्यस्थल के लिये जारी निर्देशों का पालन अनिवार्य करते हुए हर विभाग, संस्थान चाहे सरकारी हो या निजी स्तर... Read More...

साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ, “भाग १” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रदत्त बराबरी के अधिकारों का उपयोग करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतं... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग २” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधारकों ने राष्ट्रवाद के सिद्धांत के आवरण में पेश किया कि ब्रिटि... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग ३” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध और बीसवीं सदी के पूर्वाद्ध की अवधि में जिन भारतीय महिलाओं ने अपनी मेधा, विद्वत्ता और सामाजिक क्षेत्र में आंदोलनकारी व्यक्तित्व से समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित किया तथा स्त्री स्वात... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग 5” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"डॉ रशीद जहाँ वैचारिक रूप से समृद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता भी थीं और अपने वामपंथी पति महमूद ज़फर के साथ सभी राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों में सहयोग करती थीं। 1936 में जब प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना हुई और लखनऊ में ... Read More...