स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आलेख (डॉ0 नमिता सिंह)

"आदिम समाज से लेकर कबीले या गण समूहों में मातृसत्तात्मक समाज ही था और वंश अथवा संतान की पहचान माता के रूप में होती थी। आदिम समाज के स्वच्छंद यौन संबंध हों या सामाजिक विकास का यह कबीलाई रूप हो जहां एक गण के पुरु... Read More...
तीन मुलाकातें: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

तीन मुलाकातें: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

     डा0 नमिता सिंह तीन मुलाकातें मेरी और मिताली की पहली मुलाकात देहरादून में हुई थी। वहाँ के गवर्नमेंट गर्ल्स कालेज में दो दिन की सेमिनार थी। कथा साहित्य पर कोई विषय था। ‘विचार और सर्जनात्मकत... Read More...

कोख : कहानी (नमिता सिंह)

आदिकाल से आज तक समाज में स्त्रियों की दशाओं में कितना अंतर आ सका है | स्त्री स्वतंत्रता से जुड़े पहलू ख़ासकर आज़ादी, विचार, दृष्टि, इच्छा, अनिच्छा और आत्मसम्मान जैसे पहलू अनसुलझे सवालों कि तरह मौजूद हैं | इन... Read More...
घर: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

घर: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

इंसानी जीवन में घर की महत्ता को पुरुष सत्ता ने शायद सबसे पहले भांप लिया था…… क्या इसी लिए समाज में स्त्री का कोई घर नहीं होता ताकि इसी असुरक्षा बोध में वह शोषित होने को विवश होती रहे …..| तब निश्चित ही आर... Read More...