दलित साहित्य के पुरोहित: आलेख (ओमप्रकाश वाल्मीकि)

बात पुरानी॰॰॰॰ आश नई  दलित साहित्य में आत्मकथाओं ने जिस वातावरण का निर्माण किया है। वह अद्भुत है। जिसे चाहे विद्वान आलोचक जो कहें, लेकिन दलित जीवन की विद्रूपताओं को जिस साहस और लेखकीय प्रतिबद्धता के साथ दलित आ... Read More...

तब तुम क्या करोगे: कविता (ओमप्रकाश वाल्मीकि)

थोड़ी सी बारिश से देश भर के नगर, कस्बों, गांवों की सड़कें व् आम रास्ते कीचड़ और गन्दगी से भर गए हैं ..... उन्ही कीचड़ भरे रास्तों से निकलते हुए बिना किसी सवाल के लोगों की नाक भोंह सिकुड़ी हुईं हैं ..... इस हालात को ... Read More...