जलतरंग : कहानी (प्रतिभा)

उसके तिलिस्म को बिखरते हुए देखने का मेरा इन्तज़ार जितना लम्बा हो रहा था उसका तिलिस्म उतना ही ताकतवर हो रहा था..... उस कल्पनाजीवी औरत के विश्वास के महलों के आगे मेरे यथार्थ के महल काँपते नज़र आ रहे थे ..... कुछ ... Read More...

चिरनिद्रा : कहानी ( प्रतिभा)

सामाजिक सरंचना में जब इंसान अपने हित- लाभों के चलते मानवीय संवेदनाओं और आवश्यकताओं को दरकिनार कर पाखंडों और कुरूतियों के सहारे समाज में सम्मान पाने के लिए लालायित होता जाता है तब हमारे बीच एक ऐसा वर्ग पनपता है ... Read More...