प्रेम की होली: कहानी (प्रेमचंद)

प्रेमचंद साहित्य जगत के एक मात्र ऐसे सिरमौर हैं जिनकी कोई भी कहानी वर्तमान सामाजिक हालातों का दामन नहीं छोड़ती। इसीलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि प्रेमचंद महज़ एक साहित्यकार नहीं बल्कि आम-जन के सच्चे और सार्... Read More...

लेखक: कहानी (मुंशी प्रेमचंद)

बीसवीं सदी के शुरूआती दशकों से अपने लेखन से हिंदी साहित्य को "आम जन की आवाज़" के रूप में प्रस्तुत करने व साहित्य में सामाजिक और राजनैतिक यथास्थिति के यथार्थ परक चित्रण से, हिंदी साहित्य को एक नई दिशा देने वाले क... Read More...

एक चिनगारी घर को जला देती है: कहानी (तोलिस्तोय )

साहित्यिक संग्रह से 'तोल्सतोय' की कहानी ........ अनुवाद 'प्रेमचंद की' कलम से......|  एक चिनगारी घर को जला देती है  प्रमचंद -: अनुवाद - प्रेमचंद :- एक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। ... Read More...
गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान (उपन्यास- भाग 1) होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले ... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: (उपन्यास भाग 2) कहकहों से हाल गूँज उठा। संपादक जी का चेहरा फूल उठा था, आँखें झुकी पड़ती थीं। दूसरा ग्लास भर कर बोले – यह मिल मालती की सेहत का जाम है। आप लोग पिएँ और उन्हें आशी... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गौदान: भाग 3, उपन्यास (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गौदान भाग 3, उपन्यास सहसा एक देहाती एक बड़ी-सी टोकरी में कुछ जड़ें, कुछ पत्तियाँ, कुछ फूल लिए, जाता नजर आया। खन्ना ने पूछा – अरे, क्या बेचता है? देहाती सकपका गया। डरा, कहीं बेगार म... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: भाग 4, उपन्यास (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: भाग - 4 होरी ने डाँटा – चुप रह, बहुत बढ़-चढ़ न बोल। बिरादरी के चक्कर में अभी पड़ी नहीं है, नहीं मुँह से बात न निकलती। धनिया उत्तेजित हो गई – कौन-सा पाप किया है, जिसके... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

  प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 5 मेहता जी कह रहे थे – और यह पुरुषों का षड्यंत्र है। देवियों को ऊँचे शिखर से खींच कर अपने बराबर बनाने के लिए, उन पुरुषों का, जो कायर हैं, जिनमें वैवाहिक ... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 6 गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली – ऐसी स्त्री की आप तारीफ करते हैं। मेरी समझ में तो वह दया के योग्य है। मेहता ने आ... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 8 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 8 मालती ने परिहास के स्वर में कहा – खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तुम्हारे साए से भी भागूँगी। मैं रूपवती हूँ। तुम भी मेरे अनेक च... Read More...