(प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 9 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 9 पुर चलने लगा। धनिया को होरी ने न आने दिया। रूपा क्यारी बराती थी और सोना मोट ले रही थी। रूपा गीली मिट्टी के चूल्हे और बरतन बना रही थी, और सोना सशंक आँखों से सोनार... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति की घड़ी आ पहुँची। पेट को एक हाथ से पकड़े हुए पसीने से तर उसने चूल्हा जलाया, खिचड़ी डाली और दर्द से व्याकुल हो कर वहीं जमीन पर लेट रही। ... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास भाग 11, (प्रेम चंद)

प्रेमचंद गोदान : उपन्यास भाग 11 शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति की घड़ी आ पहुँची। पेट को एक हाथ से पकड़े हुए पसीने से तर उसने चूल्हा जलाया, खिचड़ी डाली और दर्द से व्याकुल हो कर वहीं ... Read More...

गोदान : उपन्यास भाग 12, (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान : उपन्यास भाग 12 मेहता उसकी ओर भक्तिपूर्ण नेत्रों से ताक रहे थे, खन्ना सिर झुकाए इसे दैवी प्रेरणा समझने की चेष्टा कर रहे थे और मालती मन में लज्जित थी। गोविंदी के विचार इतने ऊँचे, उसका ह... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

मेरी पहली रचना: कहानी (प्रेमचंद)

प्रेमचंद मेरी पहली रचना उस वक्त मेरी उम्र कोई १३ साल की रही होगी। हिन्दी बिल्कुल न जानता था। उर्दू के उपन्यास पढ़ने-लिखने का उन्माद था। मौलाना शरर, पं० रतननाथ सरशार, मिर्जा रुसवा, मौलवी मुहम्म... Read More...
लेखक: कहानी (प्रेमचंद)

लेखक: कहानी (प्रेमचंद)

बीसवीं सदी के शुरूआती दशकों से अपने लेखन से हिंदी साहित्य को “आम जन की आवाज़” के रूप में प्रस्तुत करने व साहित्य में सामाजिक और राजनैतिक यथास्थिति के यथार्थ परक चित्रण से, हिंदी साहित्य को एक नई दिशा देने ... Read More...

मोटेराम जी शास्त्री: कहानी (प्रेमचंद)

भिषगाचार्य पण्डित मोटेराम जी शास्त्री की लखनऊ मे घूम मच गई। अलंकारों का ज्ञान तो उन्हे था ही, कुछ गा-बजा भी लेते थे। उस पर गुप्त रोगो के विशेषज्ञ, रसिको के भाग्य जागें। पण्डित जी उन्हें कवित सुनाते, हंसाते, और ... Read More...

ठाकुर का कुआँ: कहानी (मुंशी प्रेमचंद)

मुंशी प्रेमचंद के लेखन काल को एक सदी से ज्यादा वक़्त हो गया | हमारी सभ्यता प्रेमचंद के तत्कालीन समय और समाज से सौ साल और आगे निकल आई | सामाजिक, सांस्कृतिक सभ्यताई विकास के इन वर्षों का एक बड़ा हिस्सा हमारी ... Read More...