हिंदी व्यंग्य की धर्मिक पुस्तक- परसाई: आलेख (प्रेम जनमेजय)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ….. ”  का तीसरा दिन ……..’प्रेम जनमेजय’ का आलेख ) हिंदी व्यंग्य साहित्य में यह निरंतर होता आया है और हो रहा है कि हास्य-व्यंग्य को एक हाईफन से जोड़ देने के कारण उसे भाई-बहन सा मा... Read More...