भोजपुरी फिल्मों का सफरनामा: समीक्षा (रविशंकर)

"सिनेमा सबसे नयी, उन्नत और आकर्षक कला है | जिसका असर जादू की तरह होता है | तब ये कैसे हो सकता है कि कोई भाषा अपने को इस जादू से दूर रखे | भोजपुरी  के साथ भी यही हुआ | सरकार की उपेक्षा और वितरकों के नैक्सस का शि... Read More...

‘किताबों के प्रति दीवानगी’ पटना पुस्तक मेला 2015: (रविशंकर)

एक ऐसे समय में जब चारों तरफ़ बाज़ार का शोर अपने चरम पर है, और एक से बढकर एक मंहगी और विलासी चीज़ों का प्रलोभन दे, लोगों के मन पर हमले कर रहा है ! शहर के हृदय स्थल(गांधी मैदान) पटना, में पुस्तक मेले का आयोजन खासा म... Read More...