नज़ीर अकबराबादी के काव्य में चित्रित मानव-समाज: शोध आलेख (सालिम मियां)

"जनसामान्य से जुडे़ होने के कारण नज़ीर ने आर्थिक विपन्नता से ग्रस्त एवं अभिशप्त लोगों की आह और कराह को किसी चैतन्य पुरूष के समान सुना और इसके कठोर आघात को आत्मिक धरातल पर अनुभव किया और उन इंसानी कराह को  ‘रोटिया... Read More...