ग्रेशम का सिद्धांत : व्यंग्य कथा (शक्ति प्रकाश)

 एक दिन लगभग सोलह साल का ग्यारहवीं में पढ़ने वाला एक लड़का मेरे पास आया था. उसकी बड़ी बहन पिछले दो साल से दसवीं में अंग्रेजी में फेल हो रही थी और इस बार उसका सेण्टर हमारे मोहल्ले के हाई स्कूल में पड़ा था, लड़का दूर ... Read More...

मंगू का हिस्सा : कहानी (शक्ति प्रकाश )

अपने समय के यथार्थ घटनाक्रमों की जटिलताओं को तोड़कर सहज रचनात्मकता के साथ उतरना किसी भी रचना की पहली प्राथमिकता है | शक्ति प्रकाश की कहानियाँ, जीवन में साँसों की मानिंद महत्त्व रखती सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक घ... Read More...

जिस लाहौर नई वेख्या ओ जन्म्या ई नई उर्फ़ माई… : नाट्य समीक्षा (शक्ति प्रकाश )

दो दिवसीय नाटक 'माई' (जिस लाहौर नहीं वेख्या ...) का  सफलता पूर्वक मंचन ........ | जिस लाहौर नई वेख्या ओ जन्म्या ई नई उर्फ़ माई... शक्ति प्रकाश कल मदार बंधुओं, हनीफ साहब, गनी साहब और सनीफ साहब के आमन्त्रण प... Read More...

‘कान्दू – कटुए’ : लघुकथा कोलाज़ “भाग तीन” (शक्ति प्रकाश)

आस-पास या पूरे सामाजिक परिवेश में हर क्षण स्वतःस्फूर्त घटित होती घटनाएं या वाक़यात किसी ख़ास व्यक्ति के इर्द-गिर्द ही घटित होते हों ऐसा तो नहीं ही है | सामाजिक संस्कृति में मानवीय संवेदनाओं से उत्पन्न होते ऐसे दृ... Read More...

‘कान्दू – कटुए’ : लघुकथा कोलाज़ “भाग दो” (शक्ति प्रकाश)

आस-पास या पूरे सामाजिक परिवेश में हर क्षण स्वतःस्फूर्त घटित होती घटनाएं या वाक़यात किसी ख़ास व्यक्ति के इर्द-गिर्द ही घटित होते हों ऐसा तो नहीं ही है | सामाजिक संस्कृति में मानवीय संवेदनाओं से उत्पन्न होते ऐसे दृ... Read More...

‘कान्दू – कटुए’ : लघुकथा कोलाज़ “भाग एक” (शक्ति प्रकाश)

आस-पास या पूरे सामाजिक परिवेश में हर क्षण स्वतःस्फूर्त घटित होती घटनाएं या वाक़यात किसी ख़ास व्यक्ति के इर्द-गिर्द ही घटित होते हों ऐसा तो नहीं ही है | सामाजिक संस्कृति में मानवीय संवेदनाओं से उत्पन्न होते ऐसे दृ... Read More...