लाईट हाउस सिनेमा: कहानी (शेखर मल्लिक)

पूंजीवादी सिद्धांतों के आधार पर विकास या सामाजिक बदलाव की प्रिक्रिया में हमेशा ही एक बड़े वर्ग की मूल आवश्यकताओं उसके सपने, आकांक्षा, बल्कि उसका सम्पूर्ण जीवन ही हाशिये का शिकार हुआ है | तकनीकी दृष्टि से सामाजिक... Read More...

मुहब्बत ही दीन-औ-ईमां मेरा: कहानी (शेखर मल्लिक)

“वसंत और तबस्सुम की अंतरजातीय शादी, इस औद्योगिक शहर के एक छोटे से हिस्से में, जहाँ ये लोग बसर कर रहे थे, एक किस्म के लोगों को पसंद नहीं आई थी… बल्कि नागवार दुस्सहासिकता लगी थी. मेरा पत्रकार मित्र विजय ब... Read More...