‘आल्हा’ शैली में लिखी गईं कुछ कवितायें: (शिव प्रकाश त्रिपाठी)

विभिन्न भारतीय कला संस्कृतियों में, पूर्वोत्तर भारतीय कला "आल्हा" लोक गायन में अपने छन्द विधान एवं गायन शैली की दृष्टि से विशिष्ट दिखाई पड़ती है । माना जाता रहा है कि इसे सुन कर निर्जीवों की नसों में भी रक्त संच... Read More...

‘शिव प्रकाश त्रिपाठी’ की कविताएँ …

कम शब्दों में बहुत कुछ कहने और समझाने का प्रयास करती 'शिव प्रकाश त्रिपाठी' की कविताएँ .......  'शिव प्रकाश त्रिपाठी' की कविताएँ ...  शिवप्रकाश त्रिपाठी 1- जब भी मै लिखता हूँ भिंची हुई मुट्ठी, भौहें तन जात... Read More...

आदर्श समाज की परिकल्पना-संत रैदास: आलेख (शिवप्रकाश त्रिपाठी)

रविदास ने ऐसे समाज की परिकल्पना की जिसमें कोई ऊंच-नीच, भेदभाव, राग-द्वेष न हो। सभी बराबर हो सामाजिक कुरीतियों न हो, जिसे कालान्तर में महात्मा गांधी द्वारा रामराज्य की अवधारणा के रुप में महत्व मिला। संत रैदास के... Read More...