मर्द नहीं रोते: कहानी (सूरज प्रकाश)

उन्‍होंने क्‍लर्क के हाथ से फार्म ले लिया है और बड़े बेमन से भर कर वापिस क्‍लर्क की डेस्‍क पर रख दिया है। तब तक क्‍लर्क वापिस आ गया है और फार्म देख रहा है। फार्म देख कर क्‍लर्क बेचैन हो गया है - ये क्‍या? यहा... Read More...

‘मंटो का टाइपराइटर’: किस्से, (सूरज प्रकाश)

कृशन चंदर जब  दिल्‍ली रेडियो में थे, तभी पहले मंटो और फिर अश्‍क भी रेडियो में आ गये थे। तीनों में गाढ़ी छनती थी। चुहलबाजी और छेड़छाड़ उनकी ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्‍सा थे। रूठना मनाना चलता रहता था। कृशन चन्दर की ए... Read More...

और’मुंशी’ प्रेमचंद’ बन गए: किस्सा, (सूरज प्रकाश)

31 जुलाई को कथा सम्राट प्रेमचंद की 137 वीं जयंती पर विशेष -  और'मुंशी' प्रेमचंद' बन गए   सूरज प्रकाश दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नहीं होते – प्रेमचंद  प्रेमचन्द (धनपतराय) (नायाब राय) (1880 - ... Read More...

एक कमज़ोर लड़की की कहानी: कहानी (सूरज प्रकाश)

उस दिन की बात वहीं खत्‍म हो गयी थी। बाद में बेशक कई बार फेसबुक पर उनकी हरी बत्‍ती उनके मौजूद होने का संकेत दे रही थी लेकिन मैंने कभी अपनी तरफ से पहल करके उन्‍हें डिस्‍टर्ब नहीं किया था। कभी करता भी नहीं। किसी क... Read More...

बाबा नागार्जुन’ सा कोई नहीं: आलेख (सूरज प्रकाश)

बिहार के धधकते खेत-खलिहानों के खेत-मजदूरों के दर्द को अपनी कविताओं से बुलंद आवाज़ देने वाले जनकवि “बाबा नागर्जुन” का व्यक्तित्व महज़ कविता लेखन तक ही सीमित नहीं रहा | आप आज़ादी के पहले से लेकर आज़ादी के बाद अपनी आख... Read More...

खो जाते हैं घर : कहानी (सूरज प्रकाश)

यथार्थ से जूझती बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी ..... वरिष्ठ साहित्यकार सूरज प्रकाश की कलम से ...| खो जाते हैं घर सूरज प्रकाश बब्बू क्लिनिक से रिलीव हो गया है और मिसेज राय उसे अपने साथ ले जा रही हैं। उन्हों... Read More...