इंतज़ार: कहानी (सुशील कुमार भारद्वाज)

आधुनिक तकनीक के साथ बदलते सामाजिक परिवेश में निश्छल कहे जाने वाले प्रेम ने भी अपना स्वरूप बदला है | महज़ मानवीय संवेदनाओं के रथ पर सवार रहने वाला प्रेम व्यावहारिक धरातल पर उतर कर जीवन यापन के लिए जैसे रोज़ी-रोटी ... Read More...

विकासोन्मुख गांव की जातिगत समस्या है : ‘चाँद के पार एक चाभी’ “समीक्षा”

'हमरंग' पर प्रकाशित हुई 'अवधेश प्रीत की कहानी 'चाँद के पार एक चाभी' को पढने के बाद कहानी के वर्तमान सामाजिक निहितार्थों पर एक विवेचनात्मक आलेख 'सुशील कुमार भारद्वाज' की कलम से .....| विकासोन्मुख गांव की जाति... Read More...

बिहार वाली बस : लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

"ले, अब मर. कितनी बार कह चुका हूं. बस में सारे बच्चे लेकर मत चलाकर. साला किधर –किधर इस भीड़ में उसे खोजूं. पांच दफा तो आवाज लगा चुका... पर कमीना जो ठहरा – एक चूं की आवाज उससे देते नहीं बन रहा." एक चुप्पी के बाद... Read More...

क्लासिकल फिल्मों का समागम : पटना फिल्म फेस्टिवल 2016: रिपोर्ट

लेकिन लंबे अरसे बाद शुरू हुए इस फिल्म समारोह की सबसे अच्छी बात यह रही कि भारतीय पैनोरमा की आठ भाषाओं की स्तरीय एवं क्लासिकल फिल्मों को देखने के लिए किसी को न तो रुपए खर्च करने पड़े न ही किसी पास का इंतज़ार. दर्शक... Read More...

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं: हृषिकेश सुलभ

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं:  15 फरवरी 1955 को बिहार के सीवान जिले के लहेजी ग्राम में स्वतंत्रता सेनानी रमाशंकर श्रीवास्तव के आंगन में एक बच्चे का जन्म हुआ जो अपनी प्रारंभिक पढाई के ... Read More...

चकाचौंध, भौतिकवादी जीवन का स्याह पक्ष: समीक्षा (शुशील भारद्वाज)

आज की मृगतृष्णा जीवन पद्धति में मानसिक एवं भावनात्मक असामंजस्य से नारकीय होते पारिवारिक जीवन से त्रस्त लोग आभासी दुनिया में सुख-शांति और जन्नत की तलाश कर रहे हैं. फ्रेंडशिप क्लबों आदि के सहारे जिंदगी को नए रूप ... Read More...

एक संस्कृति के उत्थान और पतन की कहानी, ‘कोठागोई’ (सुशील कुमार भारद्वाज)

इन दिनों चर्चा में 'प्रभात रंजन' की किताब "कोठागोई" पर एक समीक्षात्मक आलेख ...... एक संस्कृति के उत्थान और पतन की कहानी, 'कोठागोई' सुशील कुमार भारद्वाज प्रभात रंजन की नयी किताब “कोठागोई” के आने की खबर मात्र... Read More...

उस रात : लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

लघु कहानी के नए हस्ताक्षर के रूप में उभरते 'सुशील कुमार भारद्वाज' की कलम से मानवीय अंतरद्वंद को उकेरती उनकी अगली लघुकथा हमरंग के मंच से आप सब के बीच ........| - संपादक  उस रात उस रात दिल और दिमाग दोनों में ... Read More...

चकाचौंध, भौतिकवादी जीवन का स्याह पक्ष: समीक्षा

आज की मृगतृष्णा जीवन पद्धति में मानसिक एवं भावनात्मक असामंजस्य से नारकीय होते पारिवारिक जीवन से त्रस्त लोग आभासी दुनिया में सुख-शांति और जन्नत की तलाश कर रहे हैं. फ्रेंडशिप क्लबों आदि के सहारे जिंदगी को नए रूप ... Read More...

नई सांस्कृतिक पहल, मनोवेद फिल्म फेस्टिवल: रिपोर्ट

इस नई पहल का उद्देश्य फिल्मों के भीड़ में से सार्थक, सोद्देश्य एवं प्रश्नाकुल करती फिल्मों को आमजन तक पहुँचाना है. वैसी अंतर्राष्ट्रीय एवं भारतीय फिल्मों को प्रदर्शित करने की कोशिश होगी जो भौगौलिक एवं भाषाई कारण... Read More...