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कामवाली की जाति: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

सुशील कुमार भारद्वाज कामवाली की जाति गूगल से साभार सारिका बहुत परेशान थीं |घर के सारे काम खुद ही करने पड़ते थे | अंत में उसने पडोसी के घर काम करने वाली रागिनी से मदद मांगने की सोचीं ... Read More...
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ओहदेवाले: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

सुशील कुमार भारद्वाज ओहदेवाले सुधा बहुत परेशान थी| घर में शादी की बात छिड़ने के बाद से बबाल मच गया था | अंत में उसे मौसी याद आयी| अक्सर सामाजिक मुद्दों पर लिखने वाली मौसी बड़े ओहदे पर थी| समाज म... Read More...
मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं- गीताश्री (साक्षात्कार)

मैं जीवन की भावुकता को कहानी की संवेदना बनाती हूं- गीताश्री (साक्षात्कार)

पत्रकारिता से साहित्य में आई गीताश्री की कहानियाँ सताई गयी स्त्रियों की कहानियां नहीं हैं, न ही वे स्त्री मुक्ति का घोषणापत्र बनाती हैं बल्कि स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को पूरी शिद्दत से सामने लाती हैं. वर... Read More...
अवधेश प्रीत

समाज का विद्रूप चेहरा है ‘चांद के पार एक चाभी’ समीक्षा (कहानी संग्रह)

समाज का विद्रूप चेहरा है ‘चांद के पार एक चाभी’ कहानी संग्रह – चांद के पार एक चाभी लेखक – अवधेश प्रीत मूल्य – 199/- (पेपरबैक) प्रकाशक– राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली. वरिष्ठ कथाकार अवधेश प्रीत का... Read More...
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धर्म: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

छोटी छोटी सामाजिक विषमताओं को रचनात्मकता के साथ लघुकथा के रूप में प्रस्तुत करने का कौशल है सुशील कुमार भारद्वाज की कलम में | धार्मिक संकीर्णताओं के ताने बाने में उलझे समाज के बीच से ‘इंसानी धर्म’ की डोर क... Read More...
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अनुचित: लहुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

मन को समझाने भर के लिए कह लेते है कि हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे है लेकिन आज भी इस पुरुष सतात्मक समाज में महिलाओं को वह हक़ या अधिकार नहीं मिलते जिनकी वे हकदार है | इसी दर्द को बयाँ करती है सुशील कुमार भ... Read More...
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उस रात: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

लघु कहानी के नए हस्ताक्षर के रूप में उभरते ‘सुशील कुमार भारद्वाज’ की कलम से मानवीय अंतरद्वंद को उकेरती उनकी अगली लघुकथा हमरंग के मंच से आप सब के बीच ……..| – संपादक  सुशील कुमार भारद्वाज उस र... Read More...
पगली का तौलिया: लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

पगली का तौलिया: लघु कथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

मानवीय संवेदना को लेकर वर्तमान समय, समाज और सभ्यता से एक सवाल दुहराती छोटी कहानी …..|-  सुशील कुमार भारद्वाज पगली का तौलिया बाघ एक्सप्रेस के समस्तीपुर जंक्शन पहुंचते ही, भीड़ के साथ एक पगली भी उसमें च... Read More...
निर्लज्ज !: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

निर्लज्ज !: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

‘सुशील कुमार भारद्वाज’ की लघुकथायें छोटी-छोटी घटनाओं के यथावत चित्रण के रूप में सामने आती हैं | जहाँ भूत-भविष्य की लेखकीय कल्पना और उपदेश उतने ही आच्छादित रहते हैं जितने जन सामान्य के बीच घटित होने वाली घ... Read More...

संपादक न तो सोया है और न ही सोने की कोशिश कर रहा है: (सुशील कुमार भारद्वाज)

हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या पांचवें दिन प्रकाशित होंगे | हमा... Read More...