उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल….

उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल.... १-   उपेन्द्र परवाज़ आँख के मौसम जो बरसे, ज़िस्म पत्थर हो गये अब के सावन बारिशों से, बादल ही तर हो गये | इस कदर थे मोजज़े, अपने जुनूने इश्क के क़त्ल करने के बाद, खुद घायल ... Read More...
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बादल, एवं हवा…: ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

कालिदास ने सिर्फ बादलों को दूत के रूप में लिखा | यहाँ  प्राकृतिक सौन्दर्य  के विभिन्न रूपों को मानव दूत के लिए प्रतीकात्मक प्रयोग कालिदास की रचना मेघदूतम से प्रेरित प्रतीत होता है, 'उपेन्द्र परवाज़' कालिदास की इ... Read More...
उनको अपने हुश्न पे है नाज़… ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

उनको अपने हुश्न पे है नाज़… ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

उपेन्द्र परवाज़ उपेन्द्र परवाज़ यूं तो भौतिकी में शोधरत छात्र हैं लेकिन शौकिया तौर पर आप ग़ज़ल लिखते हैं आपकी दो ग़ज़लें यहाँ आपके सम्मुख हैं | विधा के अग्रज साथी उपेन्द्र की इन रचनाओं पर अपनी कीमती ... Read More...
ग़ज़ल: (उपेन्द्र परवाज़)

ग़ज़ल: (उपेन्द्र परवाज़)

उपेन्द्र परवाज़ आँख के मौसम जो बरसे, ज़िस्म पत्थर हो गये अब के सावन बारिशों से, बादल ही तर हो गये | इस कदर थे मोजज़े, अपने जुनूने इश्क के क़त्ल करने के बाद, खुद घायल ही ख़ंजर हो गये | उनके दिल क... Read More...