अतुल्य भारत की अतुल्य तस्वीर : व्यंग्य (विवेक दत्त मथुरिया)

जब कोई शख्य किसी भी अतुल्यता के अतुल्य सच को कहने की जुर्रत करता है तो अतुल्य सहिष्णुता अतुल्य असहिष्णुता में तब्दील हो जाती है। अगर आज कबीर दास कुछ कहते तो वह भी इसी अतुल्य असहिष्णुता का शिकार हो गए होते। अच्छ... Read More...