पहला सुख निरोगी काया…. (अनीता चौधरी)

पहला सुख निरोगी काया.... अनीता चौधरी विश्व जनसंख्या की दृष्टि में दूसरा स्थान रखने वाला देश भारत जिसकी आबादी लगभग एक अरब इक्कीस करोड़ है | जिसकी मू... Read More...

प्रेमचंद, एक पुनर्पाठ: संपादकीय आलेख (हनीफ़ मदार)

प्रेमचंद, एक पुनर्पाठ हनीफ मदार प्रेमचंद की साहित्य धारा को जिस तरह 'यशपाल', रांगेय राघव' और राहुल सांकृत्यायन ने जिस मुकाम तक पहुंचाने में अपनी ऊर... Read More...

विचलन भी है जरूरी: ‘हमरंग’ संपादकीय (हनीफ़ मदार)

विचलन भी है जरूरी  हनीफ मदार कल चाय की एक गुमटी पर दो युवाओं से मुलाक़ात हुई दोनों ही किन्ही मल्टीनेशनल कम्पनियों में कार्यरत हैं | इत्तेफाक से दोन... Read More...

हिंदी को जरूरत है एक “क्यों” की: संपादकीय (हनीफ मदार)

हिंदी को जरूरत है एक “क्यों” की  हनीफ मदार फिर से हिंदी दिवस पर मैं असमंजस में हूँ हर साल की तरह, ठीक वैसे ही जैसे हर वर्ष मदर्स डे, फादर्स डे…….लम... Read More...

ये है मथुरा मेरी जान….: सम्पादकीय (हनीफ मदार)

ऐसे बहुत से वाक़यात और क्षण हैं अपने इस शहर को व्यक्त करने के, बावजूद इसके, दूर शहरों और प्रदेशों के लोग इसे एक प्राचीन शहर की छवि में वही घिसी पिटी औस... Read More...

बंद ए सी कमरों में झांकते होरी, धनियाँ…, संपादकीय (हनीफ मदार)

"ऐसा नहीं कि वर्तमान यथास्थिति का विरोध या प्रतिकार आज नहीं है, बल्कि ज्यादा है | एकदम राजनीतिज्ञों की तरह | कुछ हो न हो, बदले न बदले लेकिन व्यवस्थाई ... Read More...

वह किसान नहीं है….?: (हनीफ मदार)

वह किसान नहीं है….?  हनीफ मदार किसान और किसानी पर बातें तो खूब होती रहीं हैं उसी तादाद में होती रही हैं किसानों की आत्महत्याएं | बावजूद इसके कोई ठो... Read More...

रहिमन पानी राखिये…: संपादकीय (अनीता चौधरी)

रहिमन पानी राखिये...  अनीता चौधरी मनुष्य को जीवन जीने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की जरुरत होती है हवा, पानी और भोजन | जिस तरह से हवा और भोजन के ... Read More...

क्या हम भगत सिंह को जानते हैं …? संपादकीय (हनीफ मदार)

क्या हम भगत सिंह को जानते हैं ...?  हनीफ मदार ऐसे समय में जब पूंजीवादी व्यवस्थाओं के दमन से आर्थिक व सामाजिक ढांचा चरमरा रहा है जो सामाजिक राष्ट्री... Read More...

अप्रभावी होता ‘सांस्कृतिक आंदोलन’ (हनीफ मदार)

अप्रभावी होता ‘सांस्कृतिक आंदोलन’  हनीफ मदार आज जिस दौर में हम जी रहे हैं वहां सांस्कृतिक आंदोलन की भूमिका पर सोचते हुए इस बात से इनकार नहीं किया ज... Read More...