ईदा : कहानी (हनीफ़ मदार)

हनीफ़ मदार की कहानी "ईदा" आजकल ख़ूब चर्चा में है । २०१५ में 'परिकथा' में प्रकाशित हुई कहानी पर ‘प्रतिलिपि’ मंच से शुरू हुई चर्चा लगातार जारी है । पाठक... Read More...

गन्ध: कहानी (डॉ० श्याम सखा ‘श्याम’)

"असली बात या मुद्दआ तो हमारी दोस्ती है जो चाहत व समझ की ठोस बुनियाद पर डटी है। हालाँकि हमने आपस में भविष्य के बारे में कभी कोई बात नहीं की है, पर लगभग... Read More...

इस युग का कमाल, पुस्तक मेले का हाल : शक्ति प्रकाश

वहां एक लेखक मंच भी था, यूँ खासा फोटोजैनिक था लेकिन सार्वजनिक शौचालय से बिलकुल लगा हुआ, कई आम आदमी जब शौचालय से निकल मंच के पास प्रकट होते तो उनका हाथ... Read More...

जीवन अनुभवों का सफ़र कहानी तक : समीक्षा (अनीता चौधरी)

जीवन अनुभवों का सफ़र कहानी तक अनीता चौधरी वर्तमान समय में जिन्दगी के व्यवहारिक धरातल पर वर्गीय संघर्ष, साम्प्रदायाकता, धार्मिक कट्टरता, जातीय दंश और... Read More...

चिरनिद्रा : कहानी ( प्रतिभा)

सामाजिक सरंचना में जब इंसान अपने हित- लाभों के चलते मानवीय संवेदनाओं और आवश्यकताओं को दरकिनार कर पाखंडों और कुरूतियों के सहारे समाज में सम्मान पाने के... Read More...

हिंदी रंगमंच से विश्वासघात: आलेख (अनीश अंकुर)

"शौकिया रंगमंच का आंदोलन इस देश के हर क्षेत्र में और हरेक गॉंव में फैलाना है और यही रंगमंच के टिके रहने का आधार है। शौकिया रंगमंच ही पेशेवर रंगमंच का ... Read More...

बीस सौ इक्यावन का एक दिन: कहानी (नमिता सिंह)

"मित्र ने बताया कि हिंदुस्तान के विदेशी मित्रों ने देश को लबालब आर्थिक सहायता इस शर्त पर दी थी कि देश से गरीबी हटा दी जाएगी। मित्र राष्ट्रों से पर्यटक... Read More...

श्रृंखला : कहानी (अखिलेश)

चिट्ठी, वजूद, श्रृंखला, सोने का चाकू, हाकिम कथा, जैसी कालजयी कहानियों वाले चार कथा संग्रह अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त और अन्वेषण, निर्व... Read More...

हावर्ड फास्ट एवं ख्वाजा अहमद अब्बास ने अपनी रचनाओं में हमेशा समाजवादी दृष्किोण को आगे बढ़ाया: रिपोर्ट (अनीश अंकुर)

हावर्डफ़ास्ट और ख्वाजा अहमद अब्बास जन्म्शाताव्दी वर्ष के अवसर पर "साहित्य- सिनेमा - प्रगतिशील सांस्कृतिक आन्दोलन" विषय पर पटना में आयोजित एक परिचर्चा क... Read More...

पागलों ने दुनिया बदल दी: कहानी (रमेश उपाध्याय)

घोर अँधेरे वक़्त की हताशाओं के बीच, संवेदनशील इंसानी धरती की आशाओं के सपने संजोने को, आसान है कि दिवास्वप्न देखना कह दिया जाय किन्तु उजाले की उम्मीदों ... Read More...