प्रेम की होली: कहानी (प्रेमचंद)

प्रेमचंद साहित्य जगत के एक मात्र ऐसे सिरमौर हैं जिनकी कोई भी कहानी वर्तमान सामाजिक हालातों का दामन नहीं छोड़ती। इसीलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि प... Read More...

चुटकी-चुटकी प्रेम॰॰॰: कहानी (हनीफ़ मदार)

उसने युवती के चेहरे को गौर से देखना चाहा | बैठे-बैठे घूम कर देखना शायद युवती को असहज कर सकता है यही सोचकर वह खड़ा हुआ है | लेकिन, तब तक उसकी ट्रेन आ ग... Read More...

‘शरारती लड़की’ एवं अन्य कहानियाँ : लघुकथा (सबाहत आफ़रीन)

सामाजिक ताने-बाने में सहज घटित अच्छी-बुरी घटनाएँ,  महज़ साधारण सूचनाएँ नहीं होती बल्कि एक लेखकीय संवेदना के ज्वार से गुज़रती हुई कहानियाँ होतीं हैं जो... Read More...

दंपति : कहानी (फ़्रेंज़ काफ़्का)

मैंने मदद के लिए आसपास देखा। उसके बेटे ने चादर सिर तक ओढ़ ली थी और उसकी सिसकियों की आवाज मैं साफ सुन रहा था। वह एजेंट तो किसी मछली की तरह ठंडा लग रहा ... Read More...

प्रेम के पाठ: कहानी (रमेश उपाध्याय)

किशोरावस्था से निकलकर युवावस्था में प्रवेश करते समय ही हमें फिल्में देखने के साथ-साथ ‘माया’ और ‘मनोहर कहानियाँ’ नामक पत्रिकाओं में प्रेम कहानियाँ पढ़न... Read More...

दुख : कहानी (अंतोन चेखव )

एक बार फिर वह खुद को बेहद अकेला महसूस करता है। सन्नाटे से घिरा हुआ... उसका दुख जो थोड़ी देर के लिए कम हो गया था, फिर लौट आता है, और इस बार वह और भी ता... Read More...

राजपूत कैदी : कहानी (तोल्सतोय )

एक दिन आंधी आई। एक घंटा मूसलाधार मेंह बरसा, नदियाँ-नाले भर गए। बाँध पर सात फुट पानी चढ़ आया। जहाँ तहाँ झरने झरने लगे, धार ऐसी प्रबल थी कि पत्थर लु़ढ़क... Read More...

जलतरंग : कहानी (प्रतिभा)

उसके तिलिस्म को बिखरते हुए देखने का मेरा इन्तज़ार जितना लम्बा हो रहा था उसका तिलिस्म उतना ही ताकतवर हो रहा था..... उस कल्पनाजीवी औरत के विश्वास के महल... Read More...

सुबह होने तक: कहानी (हनीफ़ मदार)

"गुड़िया खेलने की उम्र में ब्याह दिया था मुझे । मैं रानी ही तो थी उस घर की । दिन में कई-कई बार सजती-सँवरती, घर भर में किसी ऐसे फूल की तरह थी जिसके मुर... Read More...

अन्नाभाई का सलाम: कहानी (सुभाष पंत)

भाषा और ऐतिहासिक नायक सुरक्षा की मजबूत दीवारें हैं। इसके अलावा हमें अपनी कमजोर पड़ गई खिड़की तो बदलनी ही है...’’  बहुत भोला विश्वास है सावित्री तुम्ह... Read More...