गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान (उपन्यास- भाग 1) होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। ज... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: (उपन्यास भाग 2) कहकहों से हाल गूँज उठा। संपादक जी का चेहरा फूल उठा था, आँखें झुकी पड़ती थीं। दूसरा ग्लास भर कर बोले... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गौदान: भाग 3, उपन्यास (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गौदान भाग 3, उपन्यास सहसा एक देहाती एक बड़ी-सी टोकरी में कुछ जड़ें, कुछ पत्तियाँ, कुछ फूल लिए, जाता नजर आया। खन्ना ने पूछ... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: भाग 4, उपन्यास (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: भाग - 4 होरी ने डाँटा – चुप रह, बहुत बढ़-चढ़ न बोल। बिरादरी के चक्कर में अभी पड़ी नहीं है, नहीं मुँह से बात... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

  प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 5 मेहता जी कह रहे थे – और यह पुरुषों का षड्यंत्र है। देवियों को ऊँचे शिखर से खींच कर अपने बरा... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 6 गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली – ऐसी स्त्री की आप तार... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 8 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 8 मालती ने परिहास के स्वर में कहा – खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तु... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 7 दातादीन ने होरी को बीच में डाल कर कहा – सुनते हो होरी, गोबर का फैसला? मैं अपने दो सौ छोड़ के... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 9 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 9 पुर चलने लगा। धनिया को होरी ने न आने दिया। रूपा क्यारी बराती थी और सोना मोट ले रही थी। रूपा गीली मिट्... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति की घड़ी आ पहुँची। पेट को एक हाथ से पकड़े हुए पसीने से तर उसने चूल्हा जलाया,... Read More...