रसीद नं0 ग्यारह: कहानी (हनीफ मदार)

रसीद नं0 ग्यारह: कहानी (हनीफ मदार)

समय के बदलाव के साथ कदमताल करते हुए चलने एवं बेहतर जीवन यापन के लिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था की जरूरत को समझने समझाने के भ्रम जाल के बीच, समय के सा... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

मेरी पहली रचना: कहानी (प्रेमचंद)

प्रेमचंद मेरी पहली रचना उस वक्त मेरी उम्र कोई १३ साल की रही होगी। हिन्दी बिल्कुल न जानता था। उर्दू के उपन्यास पढ़ने-लिखने का उन्माद ... Read More...
लेखक: कहानी (प्रेमचंद)

लेखक: कहानी (प्रेमचंद)

बीसवीं सदी के शुरूआती दशकों से अपने लेखन से हिंदी साहित्य को “आम जन की आवाज़” के रूप में प्रस्तुत करने व साहित्य में सामाजिक और राजनैतिक यथास्थित... Read More...
घर: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

घर: कहानी (डा0 नमिता सिंह)

इंसानी जीवन में घर की महत्ता को पुरुष सत्ता ने शायद सबसे पहले भांप लिया था…… क्या इसी लिए समाज में स्त्री का कोई घर नहीं होता ताकि इसी असुरक्षा ... Read More...
…और फिर परिवार : कहानी (मज़कूर आलम)

बस, यहीं तक…: कहानी (मज़कूर आलम)

निरंतर परिवर्तित होते समय और समाज के बीच बड़ी वर्गीय अवधारणायें जिनके तमाम मिथ और यथार्थ भी समय समय पर समाज के बीच स्पष्ट होते रहे हैं, बावजूद इस... Read More...
बुझव्वल: कहानी (अमृता ठाकुर)

बुझव्वल: कहानी (अमृता ठाकुर)

सामाजिक ताने-बाने और उसके बितान में उलझी स्त्री, अबूझ मान्यताओं और परम्पराओं के नाम पर मानवीय शोषण के कितने ही आयामों से गुजरती है, उस गाँठ को ख... Read More...
सूरज प्रकाश

एक कमज़ोर लड़की की कहानी: कहानी (सूरज प्रकाश)

सूरज प्रकाश एक कमज़ोर लड़की की कहानी वे मेरी पहली फेसबुक मित्र थीं जो मुझसे रू ब रू मिल रही थीं। फेसबुक पर मेरी फ्रेंड लिस्‍ट पर बेश... Read More...
रोज़ा…: कहानी (हनीफ मदार)

रोज़ा…: कहानी (हनीफ मदार)

समाज में फ़ैली धार्मिक कट्टरता व् आडम्बरों पर तीखा प्रहार करती और ठहर कर पुनः सोचने को विवश करती, “हनीफ मदार” की   छोटी एवं बेहद मार्मिक कहानी …... Read More...
लौट आओ वसीम !: कहानी (अमृता ठाकुर)

लौट आओ वसीम !: कहानी (अमृता ठाकुर)

प्रेम, स्पंदन के साथ बाल मनो-भावों का शिद्दत से विश्लेष्ण करती ‘अमृता ठाकुर’ की बेहद संवेदनशील कहानी ….| – संपादकीय  लौट आओ वसीम ! अम... Read More...