एक छोटा-सा मजाक: कहानी (अंतोन चेख़व)

एक छोटा-सा मजाक: कहानी (अंतोन चेख़व)

मानव ह्रदय सी गतिमान, इंसानी संवेदना की इतनी सूक्ष्म नक्कासी ‘अंतोन चेख़व’ की कहानियों की वह ताकत है कि कथा पाठक से जुड़ती नहीं बल्कि ह्रदय की अनं... Read More...
चौथी का जोड़ा: कहानी (इस्मत चुग़ताई)

चौथी का जोड़ा: कहानी (इस्मत चुग़ताई)

२१ जुलाई 1915 को जन्मी साहित्यकार “इस्मत चुग़ताई” के चल रहे जन्मशती वर्ष में ‘हमरंग’ पर आज  इस्मत आपा को याद कर लेते हैं उनकी बहु चर्चित कहानियो... Read More...

जिन दिनों…: कहानी (संजीव चंदन)

दुनिया की प्रगतिशील चेतना के अग्रणी संवाहक वर्ग को केंद्र में रखकर बुनी गई ‘संजीव चंदन’ की यह कहानी आधुनिक समय और समाज का एक नया विमर्श रचती है ... Read More...
बुझव्वल: कहानी (अमृता ठाकुर)

अपने-अपने सच: कहानी (अमृता ठाकुर)

भावनात्मक संवेदनाओं से खेलना, गिरबी रखना या किसी भी कीमत पर खरीदना किसी वस्तु या खिलौने की तरह और तब तक खेलना जब तक खुद का जी चाहे फिर चाहे किसी... Read More...
अमीन मियां सनक गये हैं: कहानी (सुभाष चन्द्र कुशवाह)

अमीन मियां सनक गये हैं: कहानी (सुभाष चन्द्र कुशवाह)

सामाजिक बदलाव के समय में साहित्य से गाँव और ग्रामीण जीवन की कहानियाँ जैसे गायब होती जा रहीं हैं, उसकी जगह बाजारी अतिक्रमण से प्रभावित नगरीय जनजी... Read More...
जश्न-ए-आज़ादी : कहानी (हनीफ मदार)

जश्न-ए-आज़ादी : कहानी (हनीफ मदार)

‘हनीफ मदार’ की छोटी किन्तु बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी ‘जश्न-ए-आज़ादी’ हाल ही में आउटलुक हिंदी के जनवरी २०१६ के अंक में प्रकाशित हुई जिसे देश... Read More...
चरित्रहीन : कहानी (हनीफ मदार )

अनुप्राणित : कहानी (हनीफ मदार)

प्रेम एक खूबसूरत इंसानीय व मानवीय जीवन्तता का एहसास है  जो किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय से बढ़कर होता है जिस पर किसी भी तरह की बंदिशे नहीं लगाई ... Read More...

परवाज़: कहानी (अनीता चौधरी)

कहानी में सौन्दर्य या कलात्मक प्रतिबिम्बों की ही खोज को बेहतर कहानी का मानक मान कर किसी कहानी की प्रासंगिकता तय करना भी वक्ती तौर पर साहित्य में... Read More...
गाब्रिएल गार्सिया मार्केज

ऐसे ही किसी दिन: कहानी (गाब्रिएल गार्सिया मार्केज)

साहित्यिक संग्रह से ‘गाब्रिएल गार्सिया मार्केज’ की कहानी ……..  का अनुवाद – ‘मनोज पटेल’ की कलम से … ऐसे ही किसी दिन  अनुवाद – ‘मनोज पटेल’ ... Read More...

क़बरखुद्दा : कहानी (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

शहर मे अभी भी रियसती शहर होने के अवशेष मौजूद हैं, शहरपनाह की मोटी-मोटी दीवारें, कई दरवाज़े, अस्तबल, मक़बरे, छोटी हवेलियाँ, छोटी गढ़ियाँ, इमारतें, म... Read More...