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ओहदेवाले: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

सुशील कुमार भारद्वाज ओहदेवाले सुधा बहुत परेशान थी| घर में शादी की बात छिड़ने के बाद से बबाल मच गया था | अंत में उसे मौसी याद आयी| अक्... Read More...

स्‍त्री मन के सूक्ष्म मनोभावों को परत दर परत खोलतीं कहानियां: ‘कोई भी दिन’ ‘पंखुरी सिंहा’ :-

 पंखुरी की कहानियां स्त्री विमर्श का हिस्सा हैं, इस बयान को हालांकि खारिज नहीं किया जा सकता, क्यों कि वे स्‍त्री मन के अत्यंत सूक्ष्म मनोभावों क... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: (उपन्यास भाग 2) कहकहों से हाल गूँज उठा। संपादक जी का चेहरा फूल उठा था, आँखें झुकी पड़ती थीं। दूसरा ग्लास भर कर बोले... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गौदान: भाग 3, उपन्यास (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गौदान भाग 3, उपन्यास सहसा एक देहाती एक बड़ी-सी टोकरी में कुछ जड़ें, कुछ पत्तियाँ, कुछ फूल लिए, जाता नजर आया। खन्ना ने पूछ... Read More...
आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

स्त्री विमर्श के बीच युवा लेखिका शालिनी श्रीवास्तव की कहानियां स्त्री मुक्ति को सदियों से घेरे खड़ीं सामाजिक रूढ़िवादी मान्यताओं से सीधे मुठभेड़ कर... Read More...

जीवन की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है फिल्म : समीक्षा

जीवन की अभिव्यक्ति का साहित्य भी एक माध्यम है और फिल्म भी, अंतर केवल इतना है कि फ़िल्म अपनी बात दृश्यात्मक विधान द्वारा दर्शक और समाज के सामने आत... Read More...
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चरित्रहीन : कहानी

आज भी जिस समाज में पुरषों का इधर उधर मुहँ मारना उनकी पुरुषीय काबलियत माना जाता है और औरत के इंसान होने के हक़ की बात करना भी उसके चरित्रहीन होने ... Read More...
अवधेश प्रीत

समाज का विद्रूप चेहरा है ‘चांद के पार एक चाभी’ समीक्षा (कहानी संग्रह)

समाज का विद्रूप चेहरा है ‘चांद के पार एक चाभी’ कहानी संग्रह – चांद के पार एक चाभी लेखक – अवधेश प्रीत मूल्य – 199/- (पेपरबैक) प्रकाशक– ... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: भाग 4, उपन्यास (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: भाग - 4 होरी ने डाँटा – चुप रह, बहुत बढ़-चढ़ न बोल। बिरादरी के चक्कर में अभी पड़ी नहीं है, नहीं मुँह से बात... Read More...
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धर्म: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

छोटी छोटी सामाजिक विषमताओं को रचनात्मकता के साथ लघुकथा के रूप में प्रस्तुत करने का कौशल है सुशील कुमार भारद्वाज की कलम में | धार्मिक संकीर्णताओं... Read More...