गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: भाग 4, उपन्यास (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: भाग - 4 होरी ने डाँटा – चुप रह, बहुत बढ़-चढ़ न बोल। बिरादरी के चक्कर में अभी पड़ी नहीं है, नहीं मुँह से बात... Read More...
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धर्म: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

छोटी छोटी सामाजिक विषमताओं को रचनात्मकता के साथ लघुकथा के रूप में प्रस्तुत करने का कौशल है सुशील कुमार भारद्वाज की कलम में | धार्मिक संकीर्णताओं... Read More...

…और फिर परिवार : कहानी (मज़कूर आलम)

मज़्कूर आलम की कहानी ‘और फिर परिवार’ एक बेहद मजबूर, बेबस और लाचार लड़की की त्रासदी लगी, जो खुद को विकल्पहीन महसूस कर आत्महत्या कर लेती है, लेकिन... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 5 (प्रेमचंद)

  प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 5 मेहता जी कह रहे थे – और यह पुरुषों का षड्यंत्र है। देवियों को ऊँचे शिखर से खींच कर अपने बरा... Read More...
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फिर लौट आई कामिनी: कहानी (अनीता चौधरी)

सभ्यता एवं सभ्यता विकास की बराबर हिस्सेदार दुनिया की आधी आवादी को लेकर उसकी मुक्ति के साथ आधुनिक, शिक्षित और सभ्य समाज की परिभाषा गढ़ना हमें जितन... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 6 गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली – ऐसी स्त्री की आप तार... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 8 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 8 मालती ने परिहास के स्वर में कहा – खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तु... Read More...
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अनुचित: लहुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

मन को समझाने भर के लिए कह लेते है कि हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे है लेकिन आज भी इस पुरुष सतात्मक समाज में महिलाओं को वह हक़ या अधिकार नहीं मिलत... Read More...
आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

जड़वत: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

विचार, व्यवहार और हकीकत को परत दर परत उधेड़ती और एक सामाजिक सच्चाई का रचनात्मक ढंग से विवेचन करते हुए बेहतर कथ्य और शिल्प के साथ कैनवस पर उतरती क... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 7 दातादीन ने होरी को बीच में डाल कर कहा – सुनते हो होरी, गोबर का फैसला? मैं अपने दो सौ छोड़ के... Read More...