गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास ‘भाग 1’ (प्रेमचंद)

गोदान (उपन्यास- भाग 1) होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। ज... Read More...
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कामवाली की जाति: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

सुशील कुमार भारद्वाज कामवाली की जाति गूगल से साभार सारिका बहुत परेशान थीं |घर के सारे काम खुद ही करने पड़ते थे | अंत में उ... Read More...
‘कबीर का मोहल्ला’ वाणी पकाशन पर उपलब्ध

कबीर का मोहल्ला: कहानी (मज़कूर आलम)

‘कबीर का मोहल्ला’ मजकूर आलम के कथा संग्रह की शीर्षक कहानी है | उनकी चिर-परचित शैली में उपस्थित यह कहानी समाज में गहरे धंसे विकृत मानवीय पूर्वाग्... Read More...

एक मामूली आदमी का इंटरव्यू

    एक मामूली आदमी का इंटरव्यू  अवधेश प्रीत वह एक मामूली आदमी थे। उतने ही मामूली, जितना कि कोई दो-चार बार भी देखे तो, उसमें ऐसा ... Read More...
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ओहदेवाले: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

सुशील कुमार भारद्वाज ओहदेवाले सुधा बहुत परेशान थी| घर में शादी की बात छिड़ने के बाद से बबाल मच गया था | अंत में उसे मौसी याद आयी| अक्... Read More...

स्‍त्री मन के सूक्ष्म मनोभावों को परत दर परत खोलतीं कहानियां: ‘कोई भी दिन’ ‘पंखुरी सिंहा’ :-

 पंखुरी की कहानियां स्त्री विमर्श का हिस्सा हैं, इस बयान को हालांकि खारिज नहीं किया जा सकता, क्यों कि वे स्‍त्री मन के अत्यंत सूक्ष्म मनोभावों क... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: (उपन्यास भाग 2) कहकहों से हाल गूँज उठा। संपादक जी का चेहरा फूल उठा था, आँखें झुकी पड़ती थीं। दूसरा ग्लास भर कर बोले... Read More...
गोदान: उपन्यास भाग 2, (प्रेमचंद)

गौदान: भाग 3, उपन्यास (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गौदान भाग 3, उपन्यास सहसा एक देहाती एक बड़ी-सी टोकरी में कुछ जड़ें, कुछ पत्तियाँ, कुछ फूल लिए, जाता नजर आया। खन्ना ने पूछ... Read More...
आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

स्त्री विमर्श के बीच युवा लेखिका शालिनी श्रीवास्तव की कहानियां स्त्री मुक्ति को सदियों से घेरे खड़ीं सामाजिक रूढ़िवादी मान्यताओं से सीधे मुठभेड़ कर... Read More...

जीवन की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है फिल्म : समीक्षा

जीवन की अभिव्यक्ति का साहित्य भी एक माध्यम है और फिल्म भी, अंतर केवल इतना है कि फ़िल्म अपनी बात दृश्यात्मक विधान द्वारा दर्शक और समाज के सामने आत... Read More...