गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 6 गोविंदी के हृदय में आनंद का कंपन हुआ। समझ कर भी न समझने का अभिनय करते हुए बोली – ऐसी स्त्री की आप तार... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 6 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 8 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 8 मालती ने परिहास के स्वर में कहा – खुदा करे, मैंने गलत समझा हो, क्योंकि अगर मैं उसे सच समझ लूँगी तो तु... Read More...
article placeholder

अनुचित: लहुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

मन को समझाने भर के लिए कह लेते है कि हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे है लेकिन आज भी इस पुरुष सतात्मक समाज में महिलाओं को वह हक़ या अधिकार नहीं मिलत... Read More...
आगाज़: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

जड़वत: कहानी (शालिनी श्रीवास्तव)

विचार, व्यवहार और हकीकत को परत दर परत उधेड़ती और एक सामाजिक सच्चाई का रचनात्मक ढंग से विवेचन करते हुए बेहतर कथ्य और शिल्प के साथ कैनवस पर उतरती क... Read More...
गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 7 (प्रेमचंद)

         प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 7 दातादीन ने होरी को बीच में डाल कर कहा – सुनते हो होरी, गोबर का फैसला? मैं अपने दो सौ छोड़ के... Read More...

तीसमार खाँ: कहानी (डा० विजय शर्मा)

“अरे भई औरतों को काबू में रखना जरूरी है। बड़े घर की बेटियाँ बड़ी मगरूर होती हैं, उन्हें ठीक करना जरूरी है।” उन्होंने स्त्री संबंधी अपने विचारों का... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान: उपन्यास, भाग 9 (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान: उपन्यास, भाग 9 पुर चलने लगा। धनिया को होरी ने न आने दिया। रूपा क्यारी बराती थी और सोना मोट ले रही थी। रूपा गीली मिट्... Read More...
अम्मी…: कहानी (अवधेश प्रीत)

अम्मी…: कहानी (अवधेश प्रीत)

“माँ” यकीनन “माँ” होती है हिन्दू या मुसलमान नहीं | यह बिडम्बना ही है कि वर्तमान अवसरवादी राजनीति और उसके प्रभाव से प्रभावित समाज द्वारा गढ़ी गई अ... Read More...
सत्यनारायण पटेल

एक था चिका एक थी चिकी: कहानी (सत्यनारायण पटेल)

        सत्यनारायण पटेल एक था चिका एक थी चिकी आज रूपा का काम जल्दी समेटा गया। रोज़ रात ग्यारह के आसपास बिस्तर लगाती। आज खाना-बासन से ... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति की घड़ी आ पहुँची। पेट को एक हाथ से पकड़े हुए पसीने से तर उसने चूल्हा जलाया,... Read More...