(प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 (प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास, भाग 10 शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति की घड़ी आ पहुँची। पेट को एक हाथ से पकड़े हुए पसीने से तर उसने चूल्हा जलाया,... Read More...

भटकुंइयां इनार का खजाना: कहानी (सुभाष चन्द्र कुशवाह)

 हमारी वर्तमान सांकृतिकता की विरासतीय थाती लोक भाषा, बतकही, किस्से-कहानियाँ, मानवीय चेतना की विकास प्रक्रिया का पहला और महत्वपूर्ण पायदान रही है... Read More...
(प्रेमचंद)

गोदान : उपन्यास भाग 11, (प्रेम चंद)

प्रेमचंद गोदान : उपन्यास भाग 11 शाम को उसके पेट में दर्द होने लगा। समझ गई विपत्ति की घड़ी आ पहुँची। पेट को एक हाथ से पकड़े हुए पसीने से तर उ... Read More...

गोदान : उपन्यास भाग 12, (प्रेमचंद)

प्रेमचंद गोदान : उपन्यास भाग 12 मेहता उसकी ओर भक्तिपूर्ण नेत्रों से ताक रहे थे, खन्ना सिर झुकाए इसे दैवी प्रेरणा समझने की चेष्टा कर रहे थे औ... Read More...
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उस रात: लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

लघु कहानी के नए हस्ताक्षर के रूप में उभरते ‘सुशील कुमार भारद्वाज’ की कलम से मानवीय अंतरद्वंद को उकेरती उनकी अगली लघुकथा हमरंग के मंच से आप सब के... Read More...

मैं भी आती हूं ….! : कहानी (हनीफ मदार)

वर्तमान समय की  उपभोगातावादी व्यवस्था के कारण  हरी भरी भूमि और  पेड़ों को काटकर ईट पत्थर की चन्द दीवारों द्वारा बने मकानों के दर्द को बयाँ करती... Read More...

पानीदार …, कहानी (मज़कूर आलम)

‘रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून’ क्या हुआ गर रहीम ने कहा था तो,  शहर कोई भी हो क्या फर्क पड़ता है, पानी की समस्या सभी जगह मूलभूत समस्या ही है,... Read More...
मेरा जूता है जापानी… (लघुकथा)

मेरा जूता है जापानी… (लघुकथा)

धर्मेन्द्र कृष्ण तिवारी धर्मेन्द्र कृष्ण तिवारी पेशे से भले ही पत्रकार हैं लेकिन उनकी सामाजिक और जनवादी सोच उन्हें बाजारवाद के दौर में प्रचलित ... Read More...

कोख : कहानी (नमिता सिंह)

आदिकाल से आज तक समाज में स्त्रियों की दशाओं में कितना अंतर आ सका है | स्त्री स्वतंत्रता से जुड़े पहलू ख़ासकर आज़ादी, विचार, दृष्टि, इच्छा, अनिच्छा ... Read More...