मंगू का हिस्सा : कहानी (शक्ति प्रकाश )

अपने समय के यथार्थ घटनाक्रमों की जटिलताओं को तोड़कर सहज रचनात्मकता के साथ उतरना किसी भी रचना की पहली प्राथमिकता है | शक्ति प्रकाश की कहानियाँ, जीवन में... Read More...

हिम्मत न हारना, मेरे बच्चो!: कहानी (मैक्सिम गोर्की)

पुरानी हड्डियों को ऐसे सीधा करने के बाद वह दरवाज़े के निकट एक पत्थर पर बैठा जाता है, जाकेट की जेब से एक पोस्टकार्ड निकालता है, पोस्टकार्ड थामे हुए हाथ ... Read More...

‘कान्दू – कटुए’ : लघुकथा कोलाज़ “भाग तीन” (शक्ति प्रकाश)

आस-पास या पूरे सामाजिक परिवेश में हर क्षण स्वतःस्फूर्त घटित होती घटनाएं या वाक़यात किसी ख़ास व्यक्ति के इर्द-गिर्द ही घटित होते हों ऐसा तो नहीं ही है | ... Read More...

एक कमज़ोर लड़की की कहानी: कहानी (सूरज प्रकाश)

उस दिन की बात वहीं खत्‍म हो गयी थी। बाद में बेशक कई बार फेसबुक पर उनकी हरी बत्‍ती उनके मौजूद होने का संकेत दे रही थी लेकिन मैंने कभी अपनी तरफ से पहल क... Read More...

‘कान्दू – कटुए’ : लघुकथा कोलाज़ “भाग दो” (शक्ति प्रकाश)

आस-पास या पूरे सामाजिक परिवेश में हर क्षण स्वतःस्फूर्त घटित होती घटनाएं या वाक़यात किसी ख़ास व्यक्ति के इर्द-गिर्द ही घटित होते हों ऐसा तो नहीं ही है | ... Read More...

“शास्त्र से संवाद” : समीक्षा (अभिषेक कुमार उपाध्याय)

प्रस्तुत पुस्तक 'नामवर के नोट्स' संपूर्ण व्याख्यान नहीं बल्कि सिर्फ नोट्स हैं जो कि स्मृति के ज्ञानात्मक आधार का साक्ष्य प्रस्तुत करती है। कुल दस अध्य... Read More...

मदारी: लघुकथा (दिलीप कुमार)

हमरंग हमेशा से ही उभरते नए कलमकारों का स्वागत करता रहा है बिना उनकी शिल्प और शैली पर ज्यादा ध्यान के हाँ किन्तु विषय-वस्तु और वैचारिक प्रवाह के साथ उस... Read More...

‘कान्दू – कटुए’ : लघुकथा कोलाज़ “भाग एक” (शक्ति प्रकाश)

आस-पास या पूरे सामाजिक परिवेश में हर क्षण स्वतःस्फूर्त घटित होती घटनाएं या वाक़यात किसी ख़ास व्यक्ति के इर्द-गिर्द ही घटित होते हों ऐसा तो नहीं ही है | ... Read More...

कटी नाक, जुड़ी नाक: कहानी (अमरपाल सिंह ‘आयुष्कर’)

'अमरपाल सिंह' की कहानियों में भाषाई पकड़ और कहानीपन निश्चित ही एक प्रौड़ कथाकार होने का आभास कराता है | प्रस्तुत लघुकहानी में भी अमरपाल सिंह में एक संभा... Read More...

बिहार वाली बस : लघुकथा (सुशील कुमार भारद्वाज)

"ले, अब मर. कितनी बार कह चुका हूं. बस में सारे बच्चे लेकर मत चलाकर. साला किधर –किधर इस भीड़ में उसे खोजूं. पांच दफा तो आवाज लगा चुका... पर कमीना जो ठहर... Read More...