साइकिल की सैर : लघु कथा (बाबा मायाराम )

हर व्यक्ति के दिमाग की हार्ड डिस्क में बचपन की अनेक स्मृतियाँ अंकित होती हैं, जब भी इस बाजारी भाग दौड़ से थककर थोड़े फुर्सत के पल मिलते है तो हम उन यादो... Read More...

कहना सुनना: कहानी हिंदी में (कुमार अम्बुज) ( kahani in hindi )

मानवीय रिश्तों की गर्माहट को भेदती छद्म आज़ादी से होकर किसी बारीक रेशे की तरह गुजरती जिंदगी के बेहद सूक्ष्म कणों को पकड़ने, जोड़ने का प्रयास करती कवि 'कु... Read More...

लंदन की एक रात, हिंदुस्तान का नया सबेरा: समीक्षा (जाहिद खान)

"साल 1935 में फ्रांसीसी अदीब हेनरी बारबूस की कोशिशों से पेरिस में साम्राज्यवाद, फासिज्म के बरखिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बना ‘वल्र्ड कान्फ्रेंस ऑफ़ राइटर्स... Read More...

हाशिये के विमर्श में सशक्त उपस्थिति: समीक्षालेख (डॉ0 रमाकांत राय)

"राही मासूम रज़ा वाले खंड में ही बकलम खुद राही मासूम रज़ा के कई महत्त्वपूर्ण और अप्रकाशित आलेख भी संकलित किये गए हैं। इन आलेखों से राही मासूम रज़ा के रचन... Read More...

‘इंसान हैं’ : पुस्तक समीक्षा (अरुण श्री)

आजकल एक आम धारणा है कि जिसके हाथ में झंडा है और जिसके जुबान पर नारे हैं उसी का वैचारिक पक्ष सशक्त है । लेकिन लेखक ने ऐसे झंडाबरदारों को नहीं बल्कि उन्... Read More...

चकाचौंध, भौतिकवादी जीवन का स्याह पक्ष: समीक्षा (शुशील भारद्वाज)

आज की मृगतृष्णा जीवन पद्धति में मानसिक एवं भावनात्मक असामंजस्य से नारकीय होते पारिवारिक जीवन से त्रस्त लोग आभासी दुनिया में सुख-शांति और जन्नत की तलाश... Read More...

वारिस: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

"एक बार के हुए दंगों ने जब उन्हें जड़ से उखाड़ दिया तो वे आकर इस मोहल्ले में बस गए। दंगों में उन्हीं जैसे गरीब लोगों का नुकसान हुआ था। उन्हीं जैसे गरीब ... Read More...

एक संस्कृति के उत्थान और पतन की कहानी, ‘कोठागोई’ (सुशील कुमार भारद्वाज)

इन दिनों चर्चा में 'प्रभात रंजन' की किताब "कोठागोई" पर एक समीक्षात्मक आलेख ...... एक संस्कृति के उत्थान और पतन की कहानी, 'कोठागोई' सुशील कुमार भारद... Read More...

ड्रामा क्वीन: कहानी (अनीता मिश्रा) kahani in hindi

"सरिता ने हाथ की रस्सी को झटक कर फेंका और घूरकर लखन को देखने लगी। वह इतनी कसकर हिचकी लेकर रो रही थी कि उससे कुछ बोला नहीं जा रहा था। सास ने लानत भरी आ... Read More...

खो जाते हैं घर : कहानी (सूरज प्रकाश)

यथार्थ से जूझती बेहद मार्मिक और संवेदनशील कहानी ..... वरिष्ठ साहित्यकार सूरज प्रकाश की कलम से ...| खो जाते हैं घर सूरज प्रकाश बब्बू क्लिनिक से रिल... Read More...