गोजर: कहानी (प्रो० विजय शर्मा)

यूं तो कहानी बहुत पहले लिखी गई .... लेकिन आज पढ़ते हुए लगता है जैसे हम सब पूरा समाज असहाय गोजर (कांतर) बनता जा रहा है और ऊपर रखी अनचाही ईंट का वज़न लगात... Read More...

महापंचायत…: कहानी (अभिषेक प्रकाश)

अभिषेक की कलम खासकर साहित्यिक विधा के तौर पर पूर्व नियोजित होकर लिखने की आदी  नहीं है | हाँ बस वे मानव जीवन की घटना परिघटनाओं पर वौद्धिक क्रिया-या प्र... Read More...

जिनकी दुआ को तरसे जमाना, उन्हें भी दुआ नसीब हो : समीक्षा लेख (पद्मा शर्मा)

जीवन जीने के लिए शरीर के समस्त अंग और अवयव अपनी-अपनी अहमियत रखते हैं। शरीर का कोई भी अंग यदि अपूर्ण है तो जीवन की दौड़ में कई बाधाएँ उपस्थित हो जाती है... Read More...

बेवकूफी का सौन्दर्य: समीक्षा (आरिफा एविस)

"पूरी वर्णमाला में मेरे और तेरे और 'ञ' के अलावा और कोई स्त्रीलिंग नहीं है. .... क्या पता खूब सारे स्त्रीलिंग शब्द रहे हों लेकिन उनको मिटा दिया गया हो ... Read More...

साइकिल की सैर : लघु कथा (बाबा मायाराम )

हर व्यक्ति के दिमाग की हार्ड डिस्क में बचपन की अनेक स्मृतियाँ अंकित होती हैं, जब भी इस बाजारी भाग दौड़ से थककर थोड़े फुर्सत के पल मिलते है तो हम उन यादो... Read More...

कहना सुनना: कहानी हिंदी में (कुमार अम्बुज) ( kahani in hindi )

मानवीय रिश्तों की गर्माहट को भेदती छद्म आज़ादी से होकर किसी बारीक रेशे की तरह गुजरती जिंदगी के बेहद सूक्ष्म कणों को पकड़ने, जोड़ने का प्रयास करती कवि 'कु... Read More...

लंदन की एक रात, हिंदुस्तान का नया सबेरा: समीक्षा (जाहिद खान)

"साल 1935 में फ्रांसीसी अदीब हेनरी बारबूस की कोशिशों से पेरिस में साम्राज्यवाद, फासिज्म के बरखिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बना ‘वल्र्ड कान्फ्रेंस ऑफ़ राइटर्स... Read More...

हाशिये के विमर्श में सशक्त उपस्थिति: समीक्षालेख (डॉ0 रमाकांत राय)

"राही मासूम रज़ा वाले खंड में ही बकलम खुद राही मासूम रज़ा के कई महत्त्वपूर्ण और अप्रकाशित आलेख भी संकलित किये गए हैं। इन आलेखों से राही मासूम रज़ा के रचन... Read More...

‘इंसान हैं’ : पुस्तक समीक्षा (अरुण श्री)

आजकल एक आम धारणा है कि जिसके हाथ में झंडा है और जिसके जुबान पर नारे हैं उसी का वैचारिक पक्ष सशक्त है । लेकिन लेखक ने ऐसे झंडाबरदारों को नहीं बल्कि उन्... Read More...

चकाचौंध, भौतिकवादी जीवन का स्याह पक्ष: समीक्षा (शुशील भारद्वाज)

आज की मृगतृष्णा जीवन पद्धति में मानसिक एवं भावनात्मक असामंजस्य से नारकीय होते पारिवारिक जीवन से त्रस्त लोग आभासी दुनिया में सुख-शांति और जन्नत की तलाश... Read More...