चकाचौंध, भौतिकवादी जीवन का स्याह पक्ष: समीक्षा

आज की मृगतृष्णा जीवन पद्धति में मानसिक एवं भावनात्मक असामंजस्य से नारकीय होते पारिवारिक जीवन से त्रस्त लोग आभासी दुनिया में सुख-शांति और जन्नत की तलाश... Read More...

‘उत्तमी की माँ’ एक विमर्श की माँग: आलेख (साक्षी)

पुरुषसत्तात्मक समाज में लड़की का नैतिकता पूर्ण आचरण व स्वयं को पुरुष के आनंद की वस्तु बनाना स्त्री की नियति है और ऐसा ही उसका मनोविज्ञान भी बनता है। स... Read More...

मउगा: कहानी (कमलेश)

हमारी परम्पराएं जाती धर्म ताकत सभी एक साथ प्यार पर पैहरा बैठाने के या प्यार का गला घोंट देने की कोशिश में इंसानों का ही खून बहाते रहे हैं | प्यार तो इ... Read More...

बिटिया बड़ी हो गयी: कहानी (डॉ0 नंदलाल भारती)

"नरोत्तम- मुसीबत के माहौल में पले-बढ़े। मेरी भी नौकरी का कोई भरोसा नही था, मैं जातीय अयोग्यता की वजह से उत्पीड़न का शिकार हो चुका था । अपने तो खैर कोई श... Read More...

माप: कहानी (सृंजय )

"...यह सरकारी नौकरी पाने के पहले मैं प्राइवेट गाड़ी चलाया करता था. एक प्रोफेसर कुमार थे, उनकी गाड़ी. उन्होंने ही बताया था कि उनके गांव तेघरा के चौधरी ... Read More...

अनुप्राणित: कहानी (हनीफ मदार)

प्रेम एक खूबसूरत इंसानीय व मानवीय जीवन्तता का एहसास है  जो किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय से बढ़कर होता है जिस पर किसी भी तरह की बंदिशे नहीं लगाई जा सकत... Read More...

स्‍त्री मन के सूक्ष्म मनोभावों को परत दर परत खोलतीं कहानियां : अमृता ठाकुर

पंखुरी की कहानियां स्त्री विमर्श का हिस्सा हैं, इस बयान को हालांकि खारिज नहीं किया जा सकता, क्यों कि वे स्‍त्री मन के अत्यंत सूक्ष्म मनोभावों को परत द... Read More...

मैं क्यों पीछे रहूं…: लघुकथा (अनीता चौधरी)

"पार्वती आज तो तू सुबह से ही भूखी-प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की दुआ कर रही है |" तो वह तुरंत बोली, "अरे, बीबी जी तुमसे क्या छुपाना ! तुम्हें क्... Read More...

हिंदी उपन्यास, ‘परीक्षा गुरु’ समालोचनात्मक आलेख (आशीष जायसवाल)

हिंदी उपन्यास, ‘परीक्षा गुरु’ समालोचनात्मक आलेख (आशीष जायसवाल)  आशीष जयसवाल हिंदी उपन्यास की शुरुआत उसी युग में हुई जिसे हम आधुनिक युग या भारतेंदु ... Read More...

अब और नहीं: कहानी (फिरोज अख्तर)

चांद आज बहुत सुस्त लग रहा था। किसी की गोद में नहीं जा रहा था। आज ज्यादा ही छिरिया रहा था। मां की छाती से लगकर थोड़ी देर के लिए चुप हो जाता फिर रोने लगत... Read More...