यह नया साल: एवं अन्य कवितायेँ (अनुपम सिंह)

जहाँ एक तरफ नए साल के स्वागत के में पार्टियों और शोर-शराबों का आवेग है वहीँ वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक बदलाव के बीच किसी कलैंडर की तरह बदलते और गुजरत... Read More...

डर.. : कविता (अनिरुद्ध रंगकर्मी)

हमरंग हमेशा प्रतिवद्ध है उभरते नवांकुर रचनाकारों को मंच प्रदान करने के लिए | यहाँ हर उस रचनाकार का हमेशा स्वागत है जिसकी रचनाएँ आम जन मानस के सरोकारों... Read More...

कुछ तो शर्म करो एवं अन्य कविता (अनीता चौधरी)

पूंजीवादी राजनैतिक महत्वाकांक्षाएं, अवसर और बाज़ार के प्रभाव में नई गढ़ी जातीं और बिकतीं प्रेम व्याख्याओं की  अनुसंधानिक प्रयोगशाला में निश्छल मानवीय प्... Read More...

स्मृतियाँ एवं अन्य कवितायें : रूपाली सिन्हा

वर्तमान समय की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में कुछ सुनहले पल, यादों की पोटली लिए मन के किसी कोने को थामे रहते है जब भी थकती साँसों को थोड़ा आरम की जरुरत होती ह... Read More...

सिर्फ ‘तुम’: एवं अन्य कविताएँ (भूपेंद्र ‘भावुक’)

इंसानी हालातों के ज़ज्बाती चितेरे भूपेंद्र 'भावुक' की कविताएँ......... सिर्फ 'तुम'  भूपेंद्र भावुक हाँ सिर्फ 'तुम' हीं तो हो यहाँ वहाँ इसमें ... Read More...

जन-गण-मन: एवं अन्य कविताएँ (विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्क... Read More...

निंदक नियरे: एवं अन्य कविताएँ (रूपाली सिन्हा)

लेखन और अध्यापन से जुड़ी "रुपाली सिन्हा" की कविताओं में सहज ही वर्तमान सामाजिक, मानसिक वातावरण जीवंत रूप में उठ खडा होता जान पड़ता है | आपकी रचनात्मकता ... Read More...

शातिर आँखें: एवं अन्य कविताएँ (डॉ० मोहसिन खान ‘तनहा’)

इंसानी हकों के उपेक्षित और अनछुए से पहलुओं के मानवीय ज़ज्बातों को चित्रित करतीं 'डॉ० मोहसिन खान 'तनहा' का कवितायें  शातिर आँखें  डा0 मोहसिन खान ‘तनह... Read More...

डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें…..

इंसानी ज़ज्बातों से होकर जीवन स्पंदन की तरह हरहराती किसी हवा सी गुज़रतीं अनीता सिंह की कुछ ग़ज़लें........ डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें.....  डॉ0 अनीता सिंह... Read More...