‘दीबा नियाज़ी’ की कविताएँ॰॰॰

अतृप्त मानवीय इच्छाओं के ऊपर बेहतर ज़िंदगी का भ्रमित आवरण बुनते सुकोमल सपने दिखा कर, इंसानी जज़्बातों से खेलते हुए उन्हें अपने क़ब्ज़े में कर, इस्तेमा... Read More...

जीवन के तमाम रंगों की ग़ज़ल : समीक्षा (प्रदीप कान्त)

हिन्दी ग़ज़ल की वर्तमान पीढ़ी में जिन लोगों ने तेज़ी से अपनी अलग पहचान बनाई है उनमे एक ज़रूरी नाम प्रताप सोमवंशी का भी है| इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं ... Read More...

अहसास : कविता (अशोक तिवारी)

सामाजिक व्यवस्था में शहरों का बढ़ता आकार, लुप्त होते नदियों के किनारे, अंधा-धुंद पेड़ों की कटाई से रूकती सांसों की डोरऔर  गाँव से रोटी की तलाश में शहर... Read More...

मुसलमान: कविता (निवेदिता)

कुछ रचनाएं वर्तमान समय की विद्रूप विभीषिकाओं को बेहद स्पष्ट स्वरूप में सामने ला खड़ा करती हैं | ये रचनाएं मानव अंतर्मन को गहरे तक हिला देती हैं जहाँ इ... Read More...

मैंने एक लड़की को मरते देखा: कविता (अंजली पूनिया)

हर पल, हर दम, मरती, दम तोडती आधी दुनिया की तस्वीर, रचनात्मक दृष्टि से उकेरती साहित्यिक हस्ताक्षर बनती खुद आधी दुनिया ....... सराहनीय प्रयास हमरंग पर स... Read More...

सुखिया की डोली एवं अन्य कवितायें, अमरपाल सिंह ‘आयुष्कर

वर्तमान समय में लगातार बढ़ती तकनीकी और बाजारवाद के प्रभाव के कारण मानवीय रिश्तों के बीच आई दरार को बयाँ करती अमरपाल सिंह 'आयुष्कर की कवियायें -  अनीता ... Read More...

कलबुर्गी तुम्हारे लिए : कविता (पुलकित फिलिप)

युवा कवि 'पुलकित फिलिप' की कविताओं के रचना संसार का ज्यादा भाग आक्रोश से भरा है | यह रचनाएं गवाह हैं इस बात की कि वर्तमान युवा केवल निराशा से ही नहीं ... Read More...

अधेड़ औरतें एवं अन्य कवितायें, प्रमोद बेड़िया

शब्दों से स्पंदित होती संवेदना के जीवंत और सवाल पूर्ण छत्र उकेरती हुईं 'प्रमोद बेड़िया' की दो कवितायें ..... संपादक  अधेड़ औरतें प्रमोद बेड़िया अध... Read More...

स्त्री जब पुरुष के साथ…! एवं अन्य कविताएँ (सीमा आरिफ)

मशीनी सभ्यता से मानवीय रिश्तों की गर्माहट से तपती ज़मीन को खोज लाना लेखकीय जिद है जैसे जीवित किन्तु इंसानी अवशेषों का प्रमाण | कुछ ऐसी ही ज़िद है "सीमा ... Read More...

मुझे तुम पर पूरा यकीन हैं एवं अन्य कवितायें, नित्यानन्द गायेन

सच फासीवाद की सूली पर है | मौक़ा परस्ती न केवल चरम छू रही है बल्कि यथार्थ  चित्रण  को प्रभावित करती अवसर वादिता .... ऐसे में सच और भ्रम के खांचे में फि... Read More...