जरूर देखा है : गजलें (दिलशाद सैदानपुरी)

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने ‘दिलशाद सैदानपुरी’ के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कु... Read More...

डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें…..

इंसानी ज़ज्बातों से होकर जीवन स्पंदन की तरह हरहराती किसी हवा सी गुज़रतीं अनीता सिंह की कुछ ग़ज़लें........ डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें.....  डॉ0 अनीता सिंह... Read More...

‘सूफी सुरेन्द्र चतुर्वेदी’ की गज़लें……

'सूफी सुरेन्द्र चतुर्वेदी' की ग़ज़लें वर्तमान राजनैतिक, सामाजिक हालातों का साहित्यिक आईना हैं इनसे गुज़रते हुए शब्दों के बीच से ताज़ा बिम्बों का जीवंत हो ... Read More...

‘डॉ. राकेश जोशी’ की ग़ज़लें:

डॉ. राकेश जोशी की ग़ज़लों को दुष्यंत कुमार की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली ग़ज़लें माना जाता है. उनकी ग़ज़लों में आम-जन की पीड़ा एवं संघर्ष को सशक्त अभिव... Read More...

उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल….

उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल.... १-   उपेन्द्र परवाज़ आँख के मौसम जो बरसे, ज़िस्म पत्थर हो गये अब के सावन बारिशों से, बादल ही तर हो गये | इस कदर ... Read More...

नव वर्ष पर ‘अश्विनी आश्विन’ की चंद ग़ज़लें…….

एक और वर्ष का गुज़रना यकीनन मानव सभ्यता का एक क़दम आगे बढ़ जाना, ठहरना…. एक बार पीछे मुड़कर देखना, ताज़ा बने अतीत पर एक विहंगम दृष्टि डालकर सोचना, क्... Read More...

प्रदीप कांत की दो ग़ज़लें……

आधुनिकता के साथ गजल की दुनियां में अपनी पहचान बना चुके 'प्रदीप कान्त' अपनी दो बेहतर गजलों के साथ हमरंग पर दस्तक दे रहे हैं ....आपका हमरंग पर स्वागत है... Read More...

धोखा, माँ एवं अन्य गज़लें : दिलशाद सैदानपुरी

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने 'दिलशाद सैदानपुरी' के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कु... Read More...

‘अश्विनी आश्विन’ की ग़ज़लें

शांत पानी में फैंका गया  पत्थर, जो पानी के ऊपर मजबूती से जम रही काई को तोड़ कर पानी की सतह तक जाकर उसमें हलचल पैदा कर देता है ...... अश्विनी आश्विन की ... Read More...

‘नीलाम्बुज’ की ग़ज़लें: humrang

'नीलाम्बुज' की ग़ज़लें  नीलाम्बुज 1-  नगरी नगरी हम भटके हैं हो कर के बंजारे जी जुगनू-सा कोई दीप जला के बस्ती में मतवारे जी। आहिस्ता आहिस्ता हमने... Read More...