ऐसा क्यों है ?: ग़ज़ल (अश्विनी आश्विन)

अश्विनी आश्विन 1- ऐसा क्यों है ? इस दुनिया में ऐसा क्यों है ? जीवन इतना सस्ता क्यों है?? सब अपनी दुनिया में ग़ुम हैं, सब की हसरत, ... Read More...
आम आदमी को समर्पित: ग़ज़ल (मोहसिन ‘तनहा’)

आम आदमी को समर्पित: ग़ज़ल (मोहसिन ‘तनहा’)

मोहसिन तनहा आम आदमी को समर्पित मछलियों को तैरने का हुनर चाहिए। गंदला है पानी साफ़ नज़र चाहिए। बातों से न होगा हासिल कुछ यहाँ, आवा... Read More...

अश्विनी आश्विन: की ग़ज़लें

 शांत पानी में फैंका गया  पत्थर, जो पानी के ऊपर मजबूती से जम रही काई को तोड़ कर पानी की सतह तक जाकर उसमें हलचल पैदा कर देता है …… अश्विनी आश्विन ... Read More...

‘संध्या नवोदिता’ की ग़ज़लें….

(इन गजलों में दुष्यंत के बाद का विकास नज़र आता है. अनुभव और सम्वेदना के नए आयाम के साथ हिंदी गजल साहित्य को समृद्ध करती ग़ज़लें…humrang के पाठकों क... Read More...
ग़ज़ल : (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

ग़ज़ल : (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

आज ख़ास “माँ” को समर्पित डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ की एक ग़ज़ल डा0 मोहसिन खान ‘तनहा’ जो बीज था आज वो शजर है। ऐ माँ बस ये तेरा ही हुनर है... Read More...
ग़ज़लें: (दिलशाद ‘सैदानपुरी’)

ग़ज़लें: (दिलशाद ‘सैदानपुरी’)

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने ‘दिलशाद सैदानपुरी’ के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच... Read More...