‘प्रदीप कान्त’ की ग़ज़लें

‘प्रदीप कान्त’ की ग़ज़लें

आधुनिकता के साथ गजल की दुनियां में अपनी पहचान बना चुके ‘प्रदीप कान्त’ अपनी दो बेहतर गजलों के साथ हमरंग पर दस्तक दे रहे हैं ….आपका हमरंग पर स्वाग... Read More...
ग़ज़लें: (दिलशाद ‘सैदानपुरी’)

जरूर देखा है: ग़ज़ल (दिलशाद सैदानपुरी)

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने ‘दिलशाद सैदानपुरी’ के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के म... Read More...
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‘नीलाम्बुज’ की ग़ज़लें: हमरंग

‘नीलाम्बुज’ की ग़ज़लें  नीलाम्बुज डी. यू. से नजीर अकबराबादी की कविताओं पर एम् फिल कर चुकने के बाद जे. एन. यू. के भारतीय भाषा केंद्र से ‘सामासि... Read More...
डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ की ‘ग़ज़लें’

डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ की ‘ग़ज़लें’

डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’  डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’ स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं शोध निर्देशक जे. एस. एम. महाविद्यालय, 201, सिद्धान्त ... Read More...

15 अलविदा, 16 के स्वागत में ‘अश्विनी आश्विन’ की दो ग़ज़लें

चुप्पी और वेवशी के रहस्यमय बाने में लिपटे जाते हुए २०१५ को अलविदा कहते हुए २०१६ के आगमन पर बेहतर सामाजिक और मानवीय परिकल्पना में कुछ गहरे इंसानी... Read More...

ख़तरे में इस्लाम नहीं: एवं अन्य नज़्में (हबीब जालिब)

सदियों के रूप में गुजरते समय और देशों के रूप में धरती के हर हिस्से याने दुनिया भर में लेखकों कलाकारों ने सच बयानी की कीमत न केवल शारीरिक, मानसिक... Read More...