हवाले गणितज्ञों के: एवं अन्य कविताएँ (अभिज्ञात)

अभिज्ञात, मानवीय रिश्तों के सूक्ष्म धागे के साथ सामाजिक,  आर्थिक  विषमताओं की समर्थ सार्थक पड़ताल कर रहे हैं अपनी इन दो कविताओं में , हालांकि आपकी कवित... Read More...

रात बिखरने लगी है: एवं अन्य कविताएँ (नीता पोरवाल)

जैसे रेगिस्तान की तपती दोपहरी में पानी का दिख भर जाना भी तृषाग्नि को असीम शांति से भरकर थके क़दमों में भी एक अजीब जोश का संचरण कर देता है ......ठीक ऐसे... Read More...

‘अश्विनी आश्विन’ की ग़ज़लें

शांत पानी में फैंका गया  पत्थर, जो पानी के ऊपर मजबूती से जम रही काई को तोड़ कर पानी की सतह तक जाकर उसमें हलचल पैदा कर देता है ...... अश्विनी आश्विन की ... Read More...

‘नीता पोरवाल’ की दो कवितायेँ

(नीता पोरवाल की प्रस्तुत कविताऐ श्रमिक जीवन की त्रासद स्थिति और भरपेटों के नकली दुखों की पड़ताल करती है...संपादक ) १-  कह सकोगे क्या ? हम मेहनतकशो... Read More...

‘निलय उपाध्याय’ की दो कवितायेँ

कबीर नगर   तुम्हारा नगर तो अजीब है कबीर सच कहूं तो अदभुत, क्या तुम्हे पता था इसीलिए रच दिए एक साथ दो दो प्रतीक और किया उलटवासियों का विधान सच ... Read More...

पिंजर पर टंगी त्वचा एवं अन्य कविता (पुलकित फिलिप)

23 वर्षीय भगत सिंह आज तक युवाओं के प्रेरणा श्रोत हैं ..... यह अलग बात है कि कम ही युवा पीढ़ी भगत सिंह को महज़ एक व्यक्ति के रूप में ही नहीं उन्हें उनके ... Read More...

‘विमल कुमार’ की तीन कविताएँ

(दंगे इंसानियत के माथे पर कलंक की तरह होते हैं और जिनोसाइड जैसी अमानवीय कृत्य से इंसानियत शर्मसार होती है. दंगो में मारे गए लोग चाहे किसी धर्म/जाति/नस... Read More...

‘श्वेता मिश्र’ की कवितायें

नाइजीरिया में फैशन डिजाईनर के रूप कार्यरत 'श्वेता मिश्र' की कवितायें निच्छलता के साथ मुक्त रूप से स्त्री मन की उस अभिव्यंजना के तरह नज़र आती हैं जो न क... Read More...

‘नीलाम्बुज’ की ग़ज़लें: humrang

'नीलाम्बुज' की ग़ज़लें  नीलाम्बुज 1-  नगरी नगरी हम भटके हैं हो कर के बंजारे जी जुगनू-सा कोई दीप जला के बस्ती में मतवारे जी। आहिस्ता आहिस्ता हमने... Read More...

आज की लड़की, एवं अन्य कविताएँ: (सुलोचना खुराना)

इंसानी ज़ज्बात जब खुद व खुद शब्द ग्रहण कर मानवीय अभिव्यक्ति बनकर फूटते हैं, निसंकोच ऐसी रचनाएं मन के बेहद करीब से गुजरती हैं | कुछ ऐसा ही सुखद एहसास दे... Read More...