किसी ईश्वर की तरह नहीं: एवं अन्य कवितायेँ (विमलेश त्रिपाठी)

मानवीय प्रेम को रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करतीं 'विमलेश त्रिपाठी' की तीं कविताएँ ..... किसी ईश्वर की तरह नहीं  विमलेश त्रिपाठी मेरी देह में सूर... Read More...

प्रेम, एवं अन्य कवितायें (सुरेन्द्र रघुवंशी)

सामाजिक, राजनैतिक संकीर्णताओं के खतरनाक थपेड़ों से सदियों से जूझती आती प्रेम की अविरल धार को परिभाषित करते हुए उस सामाज के जटिल ताने-बाने में दूध और पा... Read More...

बे-सिर-पैर की बातें : कवितायें (सौरभ शेखर)

सौरभ शेखर की कवितायें समाज के वह प्रतिबिम्ब हैं जो समय के साथ चलते हुए अक्सर ही छोटी-बड़ी घटना, विचार और व्यक्तित्व के रूप में सामने आते हैं इन विभिन्न... Read More...

नीलाम्बुज की ग़ज़लें:

नीलाम्बुज ग़ज़ल और कवितायें सामान रूप से लिख रहे हैं | आपकी न केबल ग़ज़लें बल्कि कविताओं में भी राजनैतिक प्रभाव में बनती बिगड़ती सामाजिक मानवीय अमानवीय तस्... Read More...

काला – हीरा: कविता (अशोक कुमार)

कोल इंडिया में कार्यरत 'अशोक कुमार' की कविताएँ कोयले की कालिख के भीतर से झांकती धवल जीवन की लालसाएं एवं इंसानी जिजीविसा की ज़िंदा तस्वीरें हैं .......|... Read More...

अशोक कुमार पांडेय, की कवितायें

इधर हमारे आसपास किसी न किसी मुद्दे पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार हमले देखे गए हैं। हमारे जीवन में  ऐसे हालात बार-बार सामने आते रहे हैं कि हम जनगीत... Read More...

मेरी कविताएँ ही मेरा परिचय है: एवं अन्य कवितायें (तेजप्रताप नारायण)

जिंदगी के कठोर सच, संघर्ष एवं मानवीय उम्मीदों पर गहराते अंधेरों को बेबाकी से बयाँ करतीं 'तेज प्रताप नारायण' की कविताएँ .........| - संपादक मेरी कवि... Read More...

‘अश्विनी आश्विन’ की तीन ग़ज़लें

'अश्विनी आश्विन' की तीन ग़ज़लें  अश्विनी आश्विन 1-  जो भरे-बाज़ार, सब के बीच, नंगा हो गया। वो सियासतदां, शहर का फिर मसीहा हो गया।। फिर चले चाकू-छ... Read More...

कविता में मानसिक अपंगता का अंत है-लोकराग: समीक्षा

कविता में मानसिक अपंगता का अंत है-लोकराग  -: श्रीराम तिवारी :- जीवन के अंत में ही मुक्तिबोध का एक ढ़ीला-ढ़ाला कविता-संग्रह आया। उनकी एक कविता को पाठ्य... Read More...