काला – हीरा: कविता (अशोक कुमार)

कोल इंडिया में कार्यरत 'अशोक कुमार' की कविताएँ कोयले की कालिख के भीतर से झांकती धवल जीवन की लालसाएं एवं इंसानी जिजीविसा की ज़िंदा तस्वीरें हैं .......|... Read More...

अशोक कुमार पांडेय, की कवितायें

इधर हमारे आसपास किसी न किसी मुद्दे पर अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार हमले देखे गए हैं। हमारे जीवन में  ऐसे हालात बार-बार सामने आते रहे हैं कि हम जनगीत... Read More...

मेरी कविताएँ ही मेरा परिचय है: एवं अन्य कवितायें (तेजप्रताप नारायण)

जिंदगी के कठोर सच, संघर्ष एवं मानवीय उम्मीदों पर गहराते अंधेरों को बेबाकी से बयाँ करतीं 'तेज प्रताप नारायण' की कविताएँ .........| - संपादक मेरी कवि... Read More...

‘अश्विनी आश्विन’ की तीन ग़ज़लें

'अश्विनी आश्विन' की तीन ग़ज़लें  अश्विनी आश्विन 1-  जो भरे-बाज़ार, सब के बीच, नंगा हो गया। वो सियासतदां, शहर का फिर मसीहा हो गया।। फिर चले चाकू-छ... Read More...

कविता में मानसिक अपंगता का अंत है-लोकराग: समीक्षा

कविता में मानसिक अपंगता का अंत है-लोकराग  -: श्रीराम तिवारी :- जीवन के अंत में ही मुक्तिबोध का एक ढ़ीला-ढ़ाला कविता-संग्रह आया। उनकी एक कविता को पाठ्य... Read More...

घर वापसी : एवं अन्य कवितायेँ

ये कवितायें एक तरफ जीवन से रूप,रंग गंध लेती हैं तो दूसरी तरफ समाज की नब्ज़ पर भी हाथ रखती हैं। पितृसत्ता के आवरण में चलने वाले शोषण और फरेब के अनेक रूप... Read More...

जिस्म की गिरफ़्त : कवितायें (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

सामाजिक बुनावट से त्रिस्कृत  और अछूत जिन्दगी के मानवीय पहलुओं को रेखांकित करती, कथित सभ्य समाज को खुद का विद्रूप चेहरा दिखाती एवं वर्तमान व्यवस्थाओं प... Read More...

चाँद के टुकड़े : कवितायें (ब्रजेश कानूनगो)

अगर जीवन में प्रेम न हो तो जिन्दगी बेज़ार हो जाती है | संसार की उत्पत्ति ही प्रेम की धुरी पर टिकी है | प्रेम के उसी  स्पंदन की खूबसूरत अनुभूति को सहज ह... Read More...

आत्महत्या, एवं अन्य कवितायें (शहनाज़ इमरानी)

सामाजिक एवं राजनैतिक दृष्टि से निरंतर होते मानवीय क्षरण को देखती 'शहनाज़ इमरानी' की कवितायें ......... आत्महत्या  शहनाज़ इमरानी आत्महत्या पलायन है... Read More...