जयति जय जय , जयति भारत: कविता (संध्या नवोदिता)

भारतीय सेना द्वारा इंसानियत के दुश्मनों के खिलाफ अंजाम दिए गए बहादुरी के कारनामे से हम सभी न केबल गद-गद हैं बल्कि ‘जयति भारत’ की गूँज हमारे मन में उठ ... Read More...
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बादल, एवं हवा…: ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

कालिदास ने सिर्फ बादलों को दूत के रूप में लिखा | यहाँ  प्राकृतिक सौन्दर्य  के विभिन्न रूपों को मानव दूत के लिए प्रतीकात्मक प्रयोग कालिदास की रचना मेघद... Read More...

‘चाँद की आँखों में’ एवं अन्य कवितायें : (तरसेम कौर)

जीविका की जद्दो-जहद में  लगातार क्षीण होती हमारी संवेदनाएं , अपना जीना भूलकर दूसरों के  जीवन को ही अपना जीना समझने की स्त्री मन की कोमलता, प्राकृतिक औ... Read More...
क्या मैं आदमी हूँ….? (अश्विनी ‘आश्विन’ की दो ग़ज़लें)

क्या मैं आदमी हूँ….? (अश्विनी ‘आश्विन’ की दो ग़ज़लें)

अश्विनी ‘आश्विन’ अश्विनी ‘आश्विन’ उन रचनाकारों में से है जिन्हें रचनाओं के रूप में खुद के प्रकाशित होने से कहीं ज्यादा रचनाधर्मिता का... Read More...
गांव में हम कितनी हस्तियां छोड़ आये (दो ग़ज़ल: माहीमीत)

गांव में हम कितनी हस्तियां छोड़ आये (दो ग़ज़ल: माहीमीत)

महीमीत गांव में हम कितनी हस्तियां छोड़ आये गांव में हम कितनी हस्तियां छोड़ आये परिंदो संग हर मस्तियां छोड़ आये गांव में हम कितनी हस्ति... Read More...
सहमा शहर: ग़ज़लें (सतेन्द्र कुमार सादिल)

सहमा शहर: ग़ज़लें (सतेन्द्र कुमार सादिल)

फोटो -हनीफ मदार सतेन्द्र कुमार “सादिल” सतेन्द्र कुमार यूं तो भौतिकी के शोध छात्र हैं लेकिन खुशफहमी है कि वर्तमान में जहाँ युवाओं द... Read More...

सोच रहा हूँ!! नया वर्ष यह, कैसा होगा ? ग़ज़ल (अश्विनी आश्विन)

फोटो गूगल से साभार सोच रहा हूँ!! नया वर्ष यह, कैसा होगा ? सोच रहा हूँ!! नया वर्ष यह, कैसा होगा ? चिंतित हूँ!! क्या विगत वर्ष के जैस... Read More...
उनको अपने हुश्न पे है नाज़… ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

उनको अपने हुश्न पे है नाज़… ग़ज़ल (उपेन्द्र परवाज़)

उपेन्द्र परवाज़ उपेन्द्र परवाज़ यूं तो भौतिकी में शोधरत छात्र हैं लेकिन शौकिया तौर पर आप ग़ज़ल लिखते हैं आपकी दो ग़ज़लें यहाँ आपके सम्मुख ह... Read More...