उम्मीद ही तोड़ती है आदमी को हर बार: कविताएँ (नित्यानंद गायेन)

समय के बीच मानव मन की व्याकुल रिक्तता को विवेचित करतीं 'नित्यानंद गायेन' की समय सापेक्ष रचनाएँ .....|  उम्मीद ही तोड़ती है आदमी को हर बार  नित्यान... Read More...

दौड़ से बाहर: कविता (मायामृग)

सामाजिक ताने बाने में इंसानी जीवन, एकलता और सामयिक स्पंदन का सूक्ष्म विश्लेषण करती 'माया मृग' की कवितायें.... दौड़ से बाहर  मायामृग मैं दौड़ा नह... Read More...

इस्क्रा: कविता (दीपक निषाद)

"हमरंग" हमेशा ही प्रस्फुटित होते ऐसे रचनाकारों को जगह देते रहने को तत्पर रहा है जो सार्थक लेखन की दिशा में अपनी कलम चलाते दिख रहे हैं | 'दीपक निषाद' उ... Read More...

यह सभ्यता की कौनसी जंग है !: कवितायें (नित्यानंद गायेन)

उतसव धर्मिता के समय में कवि की चेतन अभिव्यक्ति, आत्ममुग्ध वक़्त को झकझोर कर अपने दौर के यथार्थ पर लाने की हमेशा रचनात्मक कोशिश करती रही है | हालांकि कव... Read More...

बाज़ार और साम्प्रदायिकता… कविता (अनवर सुहैल)

सार्थक, समर्थ और सामाजिक भाव-बोध पैदा करती 'अनवर सुहैल' की दो कवितायें .....|  बाज़ार और साम्प्रदायिकता...  बाज़ार रहें आबाद अनवर सुहैल बढ़ता रह... Read More...

मुट्ठी भर धूप : कविताएं (अमृता ठाकुर)

धूसर समय की विद्रूपताओं को देखती, समझती और मूर्त रूप में मानवीय कोमलता के साथ संघर्षशील स्त्री के समूचे वजूद का एहसास कराती दो कवितायें .....| सम्पादक... Read More...

दुनिया बदल गई: कविता (अनीश कुमार)

क्रूर भूख के अट्टाहास के बीच रोटी के लिए मानवीय संघर्षों के रास्ते इंसानी बेवशी को बयाँ करतीं 'अनीश कुमार' की दो कवितायेँ ....... दुनिया बदल गई  ... Read More...

डर… : कविता (अनिरुद्ध रंगकर्मी)

हमरंग हमेशा प्रतिवद्ध है उभरते नवांकुर रचनाकारों को मंच प्रदान करने के लिए | यहाँ हर उस रचनाकार का हमेशा स्वागत है जिसकी रचनाएँ आम जन मानस के सरोकारों... Read More...

अंधी गली का मुहाना : कविता (अशोक तिवारी)

भारतीय समाज के संघर्ष शील अतीत को सामने रखकर हमारे आज से सवाल करती 'अशोक तिवारी' की कविता ....... अंधी गली का मुहाना अशोक कुमार तिवारी ये कौन सी... Read More...

यह नया साल: एवं अन्य कवितायेँ (अनुपम सिंह)

जहाँ एक तरफ नए साल के स्वागत के में पार्टियों और शोर-शराबों का आवेग है वहीँ वर्तमान सामाजिक और राजनैतिक बदलाव के बीच किसी कलैंडर की तरह बदलते और गुजरत... Read More...