‘सुदीप सोहनी ‘नीह्सो’ की शीर्षक विहीन कविताएँ-

प्रेम एक लय है प्रकृति की, जीवन की और साँसों की, निश्चित ही उसे शब्दों में बाँध पाना आसान नहीं है बावजूद इसके दुनिया का यह खूबसूरत एहसास, मानव अभिव्यक... Read More...

इंसानियत, एवं अन्य कविताएँ (प्रेमा झा)

कुछ व्याकुल सवालों के साथ इंसानों की बस्ती में इंसानियत और प्रेम को खोजतीं 'प्रेमा झा की कवितायें ..... इंसानियत प्रेमा झा तुमने मुझे प्यार किया... Read More...

जब उम्मीदें मरती हैं: एवं अन्य कविताएँ (संध्या नवोदिता)

धूसर एकांत में समय से टकराती मानवीय व्याकुलता से टूटते दर्प और निरीह वीरान में सहमी खड़ी इंसानियत के अवशेषों के साथ चलती जिन्दगी की कल्पना बेहद खतरनाक ... Read More...

दुनिया का सबसे गरीब आदमी: कविताएँ (चंद्रकांत देवताले)

देवताले जी की कविताओं में नैतिकता व मनुष्यता का उजास दिखाई देता है साथ ही एक विरूद्ध होते संसार में रहने का सच भी ऊजागर होता है। ऐसे ही उम्मीद के कवि ... Read More...

उम्मीद ही तोड़ती है आदमी को हर बार: कविताएँ (नित्यानंद गायेन)

समय के बीच मानव मन की व्याकुल रिक्तता को विवेचित करतीं 'नित्यानंद गायेन' की समय सापेक्ष रचनाएँ .....|  उम्मीद ही तोड़ती है आदमी को हर बार  नित्यान... Read More...

दौड़ से बाहर: कविता (मायामृग)

सामाजिक ताने बाने में इंसानी जीवन, एकलता और सामयिक स्पंदन का सूक्ष्म विश्लेषण करती 'माया मृग' की कवितायें.... दौड़ से बाहर  मायामृग मैं दौड़ा नह... Read More...

इस्क्रा: कविता (दीपक निषाद)

"हमरंग" हमेशा ही प्रस्फुटित होते ऐसे रचनाकारों को जगह देते रहने को तत्पर रहा है जो सार्थक लेखन की दिशा में अपनी कलम चलाते दिख रहे हैं | 'दीपक निषाद' उ... Read More...

यह सभ्यता की कौनसी जंग है !: कवितायें (नित्यानंद गायेन)

उतसव धर्मिता के समय में कवि की चेतन अभिव्यक्ति, आत्ममुग्ध वक़्त को झकझोर कर अपने दौर के यथार्थ पर लाने की हमेशा रचनात्मक कोशिश करती रही है | हालांकि कव... Read More...

बाज़ार और साम्प्रदायिकता… कविता (अनवर सुहैल)

सार्थक, समर्थ और सामाजिक भाव-बोध पैदा करती 'अनवर सुहैल' की दो कवितायें .....|  बाज़ार और साम्प्रदायिकता...  बाज़ार रहें आबाद अनवर सुहैल बढ़ता रह... Read More...

मुट्ठी भर धूप : कविताएं (अमृता ठाकुर)

धूसर समय की विद्रूपताओं को देखती, समझती और मूर्त रूप में मानवीय कोमलता के साथ संघर्षशील स्त्री के समूचे वजूद का एहसास कराती दो कवितायें .....| सम्पादक... Read More...