सिर्फ ‘तुम’: एवं अन्य कविताएँ (भूपेंद्र ‘भावुक’)

इंसानी हालातों के ज़ज्बाती चितेरे भूपेंद्र 'भावुक' की कविताएँ......... सिर्फ 'तुम'  भूपेंद्र भावुक हाँ सिर्फ 'तुम' हीं तो हो यहाँ वहाँ इसमें ... Read More...

जन-गण-मन: एवं अन्य कविताएँ (विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्क... Read More...

निंदक नियरे: एवं अन्य कविताएँ (रूपाली सिन्हा)

लेखन और अध्यापन से जुड़ी "रुपाली सिन्हा" की कविताओं में सहज ही वर्तमान सामाजिक, मानसिक वातावरण जीवंत रूप में उठ खडा होता जान पड़ता है | आपकी रचनात्मकता ... Read More...

शातिर आँखें: एवं अन्य कविताएँ (डॉ० मोहसिन खान ‘तनहा’)

इंसानी हकों के उपेक्षित और अनछुए से पहलुओं के मानवीय ज़ज्बातों को चित्रित करतीं 'डॉ० मोहसिन खान 'तनहा' का कवितायें  शातिर आँखें  डा0 मोहसिन खान ‘तनह... Read More...

डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें…..

इंसानी ज़ज्बातों से होकर जीवन स्पंदन की तरह हरहराती किसी हवा सी गुज़रतीं अनीता सिंह की कुछ ग़ज़लें........ डॉ0 अनीता सिंह की गज़लें.....  डॉ0 अनीता सिंह... Read More...

‘सूफी सुरेन्द्र चतुर्वेदी’ की गज़लें……

'सूफी सुरेन्द्र चतुर्वेदी' की ग़ज़लें वर्तमान राजनैतिक, सामाजिक हालातों का साहित्यिक आईना हैं इनसे गुज़रते हुए शब्दों के बीच से ताज़ा बिम्बों का जीवंत हो ... Read More...

भविष्य की मौत: एवं अन्य कविताएँ (दामिनी यादव)

जहाँ वर्तमान जब मौजूदा प्रतीकों के साथ असल रूप में संवेदनाओं के धरातल पर रचनात्मक दस्तक देता है तब कोई कविता महज़ एक रचना या लेखकीय कृति भर नहीं रह जात... Read More...

‘आल्हा’ शैली में लिखी गईं कुछ कवितायें: (शिव प्रकाश त्रिपाठी)

विभिन्न भारतीय कला संस्कृतियों में, पूर्वोत्तर भारतीय कला "आल्हा" लोक गायन में अपने छन्द विधान एवं गायन शैली की दृष्टि से विशिष्ट दिखाई पड़ती है । माना... Read More...

अदृश्य दुभाषिया: एवं अन्य कविताएँ (अभिज्ञात)

अचेतन मानव तंतुओं को चेतन में लाने का प्रयास करतीं 'अभिज्ञात' की कवितायें ...... अदृश्य दुभाषिया  अभिज्ञात चिट्ठियां आती हैं आती रहती हैं कागज... Read More...