बुरे दिनों के कलैण्डरों में: कविता (प्रदीप मिश्र)

के० पी० सिंह मेमोरियल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित 'मलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरूस्कार' 2016 "प्रदीप मिश्र" को दिए जाने पर उन्हें हमरंग परिवार की बध... Read More...

भाषा बहता नीर है: समीक्षा ‘कुतुबनुमा’ कविता संग्रह, (प्रदीप कांत)

अग्रज कवि सुमित्रानंदन पंत ने कहा था - वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान। निकलकर आँखों से चुपचाप, बही होगी कविता अनजान...| यह कविता का एक कारण... Read More...

‘आया हमीं में से है’: अखिलेश्वर पांडेय की कविताएँ…

अखिेलश्वर पांडेय का एक कविता संग्रह ‘पानी उदास है’ हालिया प्रकाश्य है। भारी-भरकम शब्दावलियों से बाहर फिजाओं में तत्सम और तद्भव के बीच तैर रहे देसी आमफ... Read More...

जब ग़ज़ल मेहराबान होती है: समीक्षालेख (प्रदीप कांत)

कभी कतील शिफाई ने कहा था- लाख परदों में रहूँ, भेद मेरे खोलती है, शायरी सच बोलती है| अशोक भी इस तरह के सच का सामना करने की हिम्मत रखते हैं तभी कह पाते ... Read More...

एक अकेली स्त्री से मिलकर, एवं अन्य कविताएँ (डॉ० रंजना जयसवाल)

विवशता, कोमलता, आक्रान्त एवं संवेदनात्मक स्पंदन जैसे सूक्ष्म प्राकृतिक रूपों में प्रत्यक्ष स्त्री के मानसिक, दैहिक और वैचारिक मनोभावों को खोजने और समझ... Read More...

‘डॉ. राकेश जोशी’ की ग़ज़लें:

डॉ. राकेश जोशी की ग़ज़लों को दुष्यंत कुमार की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली ग़ज़लें माना जाता है. उनकी ग़ज़लों में आम-जन की पीड़ा एवं संघर्ष को सशक्त अभिव... Read More...

क्रोध का प्रबंधन, एवं अन्य कविता (रूपाली सिन्हा)

वक्ती हालातों, ज़ज्बातों और संवेदनाओं को शब्दों के सहारे कविता में पिरोने का सार्थक प्रयास करतीं 'रूपाली सिन्हा' की दो कविताएँ .......| - संपादक  क्रो... Read More...

परले ज़माने का राजा: कविता (सूरज बडात्या)

हिंदी कविता में प्रखर राजनितिक चेतना और वैज्ञानिक सोच के धनी सूरज बडत्या की कवितायें समय-सापेक्ष हैं और हस्तक्षेप करती हैं अपने समय की चुनौतियों से---... Read More...

अनीता चौधरी की तीन कविताएँ….

इंसान के दुनिया में आने के साथ ही प्रेम दुनिया में आया और भाषा के बनने के साथ ही प्रेम की रचनात्मक अभिव्यक्ति कविता भी किन्तु साहित्य में कविताई प्रेम... Read More...

‘मायामृग’ की दो कविताएँ….

 'मायामृग' की दो कविताएँ.... ठहरी हुई आवाज़ें  मायामृग कुआं नींद में है नहीं लौटेंगी तुम्‍हारी अावाज़ें स्‍वरभक्षी नहीं है कुआं पर दीवारों की... Read More...