परले ज़माने का राजा: कविता (सूरज बडात्या)

हिंदी कविता में प्रखर राजनितिक चेतना और वैज्ञानिक सोच के धनी सूरज बडत्या की कवितायें समय-सापेक्ष हैं और हस्तक्षेप करती हैं अपने समय की चुनौतियों से---... Read More...

अनीता चौधरी की तीन कविताएँ….

इंसान के दुनिया में आने के साथ ही प्रेम दुनिया में आया और भाषा के बनने के साथ ही प्रेम की रचनात्मक अभिव्यक्ति कविता भी किन्तु साहित्य में कविताई प्रेम... Read More...

‘मायामृग’ की दो कविताएँ….

 'मायामृग' की दो कविताएँ.... ठहरी हुई आवाज़ें  मायामृग कुआं नींद में है नहीं लौटेंगी तुम्‍हारी अावाज़ें स्‍वरभक्षी नहीं है कुआं पर दीवारों की... Read More...

उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल….

उपेन्द्र परवाज़: की ग़ज़ल.... १-   उपेन्द्र परवाज़ आँख के मौसम जो बरसे, ज़िस्म पत्थर हो गये अब के सावन बारिशों से, बादल ही तर हो गये | इस कदर ... Read More...

मंडी हाउस में एक शाम: एवं अन्य कविताएँ (अंकिता पंवार)

कविता प्रेम है, प्रकृति है, सौन्दर्य है और सबसे ऊपर एक माध्यम है खुद के प्रतीक बिम्बों में समाज के धूसर यथार्थ को उकेरने का | जैसे खुद से बतियाते हुए ... Read More...

एक मोर्चा एवं अन्य कवितायें : जिजीविषा रजनी

शब्द और संवेदनाओं के सम्मलित एहसास से गुथी जिजीविषा रजनी की कविताएँ सहज ही मानवीय अन्तःकरण में इंसानी उद्वेग को झकझोरती सी प्रतीत होती हैं | जैसे खड़े ... Read More...

नव वर्ष पर ‘अश्विनी आश्विन’ की चंद ग़ज़लें…….

एक और वर्ष का गुज़रना यकीनन मानव सभ्यता का एक क़दम आगे बढ़ जाना, ठहरना…. एक बार पीछे मुड़कर देखना, ताज़ा बने अतीत पर एक विहंगम दृष्टि डालकर सोचना, क्... Read More...

लकीरें— एवं अन्य कविताएँ (रवि सिंह)

संवेदनाएं किसी सीमा, रेखा, पद, प्रतिष्ठा या क़ानून की बंदिश से ऊपर वह मानवीय गुण है जो इंसानी दृष्टि से शुरू होकर प्रेम और करुणा तक जाता है और सम्पूर्ण... Read More...