स्मार्ट सिटी: एवं अन्य कविता (जिजीविषा)

चैनल, टी आर पी, विज्ञापन, शोशल मीडिया, इंटरनेट, बाज़ार और चकाचौंध से बनते स्मार्ट सिटी की आबो-हवा को साँसों से अपने अन्दर खींचते हुए यह याद रख पाना कि,... Read More...

तब तुम क्या करोगे: कविता (ओमप्रकाश वाल्मीकि)

थोड़ी सी बारिश से देश भर के नगर, कस्बों, गांवों की सड़कें व् आम रास्ते कीचड़ और गन्दगी से भर गए हैं ..... उन्ही कीचड़ भरे रास्तों से निकलते हुए बिना किसी ... Read More...

जीवन में बसती हैं कविताएँ: समीक्षा (सुरेश उपाध्याय)

ब्रजेश कानूनगो की कविताओं पर बात करने के लिए कवि के अपने परिवेश और क्रमिक विकास को समझना एक बेहतर उपाय हो सकता है। कविताओं में उनकी सरल भाषा, सहज सम्प... Read More...

“चल रे मन दूर कहीं.” एवं अन्य कविताएँ (नीलम स्वर्णकार)

मानव जीवन की संवेदनाओं एवं कोमल भावों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देती पूरे आत्मविश्वास से भरी 'नीलम स्वर्णकार' की कुछ कविताएँ ......| - संपादक  "चल रे ... Read More...

अच्छा आदमी!!! एवं अन्य कविताएँ: (सुशील उपाध्याय)

वर्तमान समय में समाज से लुप्त होती मानवीय संवेदनाओं के पहलूओं को विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त करती सुशील  उपाध्याय की कविताएँ - सम्पादक  अच... Read More...

मध्यरात्रि का विषाद: एवं अन्य कवितायेँ (अभिनव निरंजन)

शांत, शिथिल, सोई सी पानी के ऊपर पसरी काई की परत पर जैसे कोई कंकड़ फैंक दिया हो, कुछ इसी तरह वर्तमान समय के साथ पसरती आत्मविस्मृति की परत पर वैचारिक उद्... Read More...

मेरा शहर भोपाल एवं अन्य कवितायेँ : शहनाज़ इमरानी

गहरे प्रतीक संदर्भों में वर्तमान सामाजिक हालात और राजनैतिक व्यवस्था के बनते कथित तांबई परिदृश्य के बीच से बारीक पड़ताल के साथ आम जन और मानव जाति व् उसक... Read More...

कवि की मौत : कविता (प्रशांत विप्लवी)

आज की बाजारवादी सामाजिक व्यवस्था के कारण कवितातों में से सिमटते ग्रामीण परिवेश को शिद्दत से महसूसती प्रशांत विप्लवी की यह कविता - अनीता चौधरी कवि की ... Read More...

धोखा, माँ एवं अन्य गज़लें : दिलशाद सैदानपुरी

रंग मंच कि दुनिया में प्रवेश करने से पहले आपने 'दिलशाद सैदानपुरी' के नाम से गज़लें लिखना शुरू किया और यह लेखन का सफ़र आज भी जारी है | हमरंग के मंच से कु... Read More...

सुबह ऐसे आती है: कविता (निर्मल गुप्ता)

सच के धरातल पर आकार लेती मानवीय अभिव्यक्ति की एक कविता........ सुबह ऐसे आती है  पुजारी आते हैं नहा धोकर अपने अपने मंदिरों में जब रात घिरी होती है।... Read More...