यादें हैं शेष, इंसान और इंसानियत को ऊँचाई देने वाले कवि की:

कुंवर नारायण (19 सितम्बर, 1927, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश) हिन्दी के सम्मानित कवियों में गिने जाते हैं। कुंवर जी की प्रतिष्ठा और आदर हिन्दी साहित्य की भया... Read More...

एक संक्षिप्त परिचय और कवितायें : स्मरण-शेष, वीरेन डंगवाल

इस त्रासद समय में भी 'उजले दिन जरूर आएंगे' का भरोसा दिलाने वाले साथी जन कवि 'वीरेन डंगवाल' हमारे बीच नहीं रहे | आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली ....| इ... Read More...

पढ़ने-गुनने की जगह : संस्मरण (राजेश उत्साही)

"1985 में जब चकमक शुरू हुई तो किताबों से बिलकुल अलग तरह का रिश्‍ता शुरू हुआ।  हर महीने चकमक के लिए सामग्री जुगाड़ने, तैयार करने के लिए घंटों इस पुस्‍त... Read More...

थम गया संगीत का एक और स्वर: “रवींद्र जैन” , डा0 मोहसिन खान ‘तनहा’

कालाकार कभी अपनी चमक खोते नहीं हैं, बल्कि इनकी चमक कभी न डूबने वाले, कभी न टूटने वाले सितारों के समान है, जो दिन में, रात में अपनी आभा लिए झिलमिला रहे... Read More...

एक जिप्सी चितेरे का जीवन संघर्ष: (राजेश चन्द्र)

मुंबई के बीहड़ फुटपाथों पर रात गुज़ारते हुए हुसैन सिनेमा के होर्डिंग बनाने का काम शुरू करते हैं और उनकी गुमनामी के दिन तब समाप्त होते हैं जब वे 1947 में... Read More...

‘मंटो का टाइपराइटर’: किस्से, (सूरज प्रकाश)

कृशन चंदर जब  दिल्‍ली रेडियो में थे, तभी पहले मंटो और फिर अश्‍क भी रेडियो में आ गये थे। तीनों में गाढ़ी छनती थी। चुहलबाजी और छेड़छाड़ उनकी ज़िंदगी का ... Read More...

लोकतंत्र बचेगा तभी हम बचेंगे: (डॉ० नमिता सिंह)

ये समझा जाता रहा है कि पत्रकार जनता की धड़कन पहचानते हैं और उसे शब्द देते हैं। वे एक प्रकार से जनता के प्रतिनिधि बन कर सत्ता और समाज के बीच सेतु होते ह... Read More...

मौत के बाद भी आवाज़ ज़िंदा है, ‘गौरी लंकेश’: आलेख (आरिफा एविस)

इस तरह की हत्याओं का ये पहला मामला नहीं हैं. पहले भी आवाज उठाने वालों को मौत के घाट उतार दिया. दाभोलकर ,पनसारे ,कलबर्गी और गौरी लंकेश में एक ही चीज कॉ... Read More...

मासूम से राही मासूम रज़ा तक…: साक्षात्कार (हनीफ मदार)

राही मासूम रजा का नाम वर्तमान युवा वर्ग के बीच से उसी तरह गुमनाम होता जा रहा है जिस तरह प्रेमचन्द, त्रिलोचन शास्त्री, यशपाल, रांगेय राघव, नागार्जुन, म... Read More...

जन-गण-मन एवं अन्य कवितायें, स्मरण शेष (रमाशंकर यादव ‘विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्क... Read More...