हरिशंकर परसाई को मेरा जानना और समझना: संस्मरण (ब्रजेश कानूनगो)

इंदौर से निकलने वाले 'नईदुनिया' अखबार का 70-80 कभी बड़ा महत्त्व हुआ करता था. बल्कि यह अखबार पत्रकारिता, साहित्यिक पत्रकारिता के स्कूल की तरह भी जाना जा... Read More...

’ए गुड-सेकेण्ड बॉय : संस्मरण (पद्मनाभ गौतम )

बाजार की एक पुरानी पुस्तकों की दुकान पर रद्दी में इन्द्रजाल चित्रकथा के अंग्रेजी संस्करण के सैकड़ों पुराने अंक मिल गए थे। अपने प्रिय पात्र फैण्टम, मैंण... Read More...

ए गुड सेकेण्ड बॉय : संस्मरण (पद्मनाभ गौतम)

हिन्दी की पुस्तकों के पीछे जैसे पागल था मैं! पुस्तक-महल से छपी पुस्तक ’संसार के 501 अद्भुत आश्चर्य’ जब बैकुण्ठपुर के बस-स्टैंड की पुस्तक-दुकान पर बिकन... Read More...

मेरा रुझान विजुअल आर्ट और लेखन दोनों के प्रति रहा है: “असग़र वजाहत” साक्षात्कार

अपनी किताब ‘असग़र वजाहत –चुनी हुई कहानियां' के पर एक चर्चा के लिए कानपुर आये लेखक डाक्टर असग़र वजाहत | वैसे कानपुर शहर उनके लिए अजनबी नहीं है । ननिहाल ह... Read More...

“हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ)

हमरंग पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या प... Read More...

ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही स... Read More...

रमणिका फांउडेशन और दलित लेखक संघ की काव्य-गोष्ठी: रिपोर्ट (सुमन कुमारी)

प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को रमणिका फांउडेशन और भारतीय दलित लेखक  संघ के संयुक्त तत्वाधान में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में हर ब... Read More...

जश्न-ए-रेख्ता 2016: रिपोर्ट (सीमा आरिफ)

जश्न-ए-रेख्ता जलसे का आयोजन पिछले दो सालों से दिल्ली में किया जा रहा है.इस बार इस कार्यक्रम का आयोजन 12-14 फरवरी २०१६ को इंदिरा गांधी राष्टीय कला केंद... Read More...

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं: हृषिकेश सुलभ

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं:  15 फरवरी 1955 को बिहार के सीवान जिले के लहेजी ग्राम में स्वतंत्रता सेनानी रमाशंकर श्रीवास्तव... Read More...

शांतिनिकेतन की यात्रा : संस्मरण (बाबा मायाराम)

यहां घूमते घामते मैं सोच रहा था, क्या जरूरत थी टेगौर जैसे संभ्रांत वर्ग के व्यक्ति को जंगल में रहने की और शांतिनिकेतन की स्थापना की। इसका जवाब उनके लि... Read More...