मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ: आत्मकथ्य (मंटो)

'अगर पूछा जाए कि मैं कहानी क्यों लिखता हूँ, तो कहूँगा कि शराब की तरह कहानी लिखने की भी लत पड़ गई है। मैं कहानी न लिखूँ, तो मुझे ऐसा लगता है कि मैंने कपड़े नहीं पहने हैं या गुसल नहीं किया है या शराब नहीं पी है। दर... Read More...

तारीख के जंगलों से निकलतीं यादें: संस्मरण (निवेदिता)

“बराबरी, समानता और वैचारिक आजादी के पक्ष में काम करने वाले संगठनों की पहली चुनौती थी, अपने भीतर बदलाव लाना। वे खुद अभी इसके लिए तैयार नहीं थे। स्त्री-पुरुषों के संबंधों को लेकर हमारा नजरिया तंग था। साथियों के भ... Read More...

किसने बिगाड़ा मुझे: आत्मकथ्य (डा० विजय शर्मा)

यूं तो इंसानी व्यक्तित्व के बनने बिगड़ने में हमारे सामाजिक परिवेश की बड़ी भूमिका होती है किन्तु इस बिगड़ने “इंसान बनने” के लिए सामाजिक असमानताओं और विषमताओं के खिलाफ मन में उठते सवालों को न मार कर उनके जबाव खोजने ... Read More...

इंडिया कॉफी हाउस का गुजरा हुआ जमाना: संस्मरण

पटना के ‘इंडिया कॉफी हाउस’ के बंद हुए अभी मात्र तीन वर्ष ही बीते हैं। पर उसकी याद ऐसे आती है जैसे कि वह कोई गुजरे हुए जमाने की सु-सुखद स्मृति हो।-  सूर्यनारायण चौधरी (सूर्यनारायण चौधरी को उनके जन्म द... Read More...
आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने: सख्शियत (सैयद एस तौहीद)

आईए ‘नक्शाब जारचवी’ को जाने: सख्शियत (सैयद एस तौहीद)

आज फिल्मउद्योग में बाजारी प्रभाव और नित नए उगते चहरों कि भीड़ में गुम होते और हो चुके कई नामों में शामिल है बुलंद शहर में जन्मे  गीतकार  ‘नक्शाब जारचवी’ का नाम विसरे हुए इसी फनकार कि कुछ यादें ताज़ा करा रहे... Read More...

जो है, उससे बेहतर चाहिए का नाम है ‘विकास’: संस्मरण (अनीश अंकुर)

भगत सिंह या सफ़दर हाशमी के जाने के बाद सांस्कृतिक या वैचारिक परिक्षेत्र या आन्दोलन रिक्त या विलुप्त हो गया ….या हो जाएगा यह मान लेना निश्चित ही भ्रामक है बल्कि सच तो यह है कि उनकी परम्परा के प्रतिबद्ध संवा... Read More...
‘हरिशंकर परसाई’ से एक पत्र व्यवहार: (संकलन से)

‘हरिशंकर परसाई’ से एक पत्र व्यवहार: (संकलन से)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है ….. ”  का दूसरा दिन ……..) २६ अगस्त,१९७३,  देशबन्धु,रायपुर, में प्रकाशित हुआ हरिशंकर परसाई के दोस्त  ‘मायाराम सुरजन’ का खुला पत्र | इसके प्रतिउत्तर में ‘हरिशंकर परसाई’ क... Read More...
यूनुस खान

उफ़ परसाई हाय परसाई: संस्मरण (यूनुस खान)

(“हरिशंकर परसाई: – चर्चा ज़ारी है …….” के आठवें दिन ……. यूनुस खान का आलेख ‘) हिम्‍मत नहीं थी कि आकाशवाणी की कैजुएली वाले उन दिनों में अपनी बेहद प्रिय ‘स्‍ट्रीट-कैट’ साइकिल को परसाई जी के घर की ओर मोड़ द... Read More...