यादें हैं शेष, इंसान और इंसानियत को ऊँचाई देने वाले कवि की:

कुंवर नारायण (19 सितम्बर, 1927, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश) हिन्दी के सम्मानित कवियों में गिने जाते हैं। कुंवर जी की प्रतिष्ठा और आदर हिन्दी साहित्य की भया... Read More...

एक संक्षिप्त परिचय और कवितायें : स्मरण-शेष, वीरेन डंगवाल

इस त्रासद समय में भी 'उजले दिन जरूर आएंगे' का भरोसा दिलाने वाले साथी जन कवि 'वीरेन डंगवाल' हमारे बीच नहीं रहे | आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली ....| इ... Read More...

थम गया संगीत का एक और स्वर: “रवींद्र जैन” , डा0 मोहसिन खान ‘तनहा’

कालाकार कभी अपनी चमक खोते नहीं हैं, बल्कि इनकी चमक कभी न डूबने वाले, कभी न टूटने वाले सितारों के समान है, जो दिन में, रात में अपनी आभा लिए झिलमिला रहे... Read More...

एक जिप्सी चितेरे का जीवन संघर्ष: (राजेश चन्द्र)

मुंबई के बीहड़ फुटपाथों पर रात गुज़ारते हुए हुसैन सिनेमा के होर्डिंग बनाने का काम शुरू करते हैं और उनकी गुमनामी के दिन तब समाप्त होते हैं जब वे 1947 में... Read More...

मौत के बाद भी आवाज़ ज़िंदा है, ‘गौरी लंकेश’: आलेख (आरिफा एविस)

इस तरह की हत्याओं का ये पहला मामला नहीं हैं. पहले भी आवाज उठाने वालों को मौत के घाट उतार दिया. दाभोलकर ,पनसारे ,कलबर्गी और गौरी लंकेश में एक ही चीज कॉ... Read More...

जन-गण-मन एवं अन्य कवितायें, स्मरण शेष (रमाशंकर यादव ‘विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्क... Read More...

ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही स... Read More...

जो है, उससे बेहतर चाहिए का नाम है ‘विकास’ : आलेख (अनीश अंकुर)

भगत सिंह या सफ़दर हाशमी के जाने के बाद सांस्कृतिक या वैचारिक परिक्षेत्र या आन्दोलन रिक्त या विलुप्त हो गया ....या हो जाएगा यह मान लेना निश्चित ही भ्राम... Read More...
जन कवि ‘वीरेन डंगवाल’ को आखिरी सलाम (हमरंग)

जन कवि ‘वीरेन डंगवाल’ को आखिरी सलाम (हमरंग)

इस त्रासद समय में भी ‘उजले दिन जरूर आएंगे’ का भरोसा दिलाने वाले साथी जन कवि ‘वीरेन डंगवाल’ हमारे बीच नहीं रहे | आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली ... Read More...

थम गया संगीत का एक और स्वर: “रवींद्र जैन”

कालाकार कभी अपनी चमक खोते नहीं हैं, बल्कि इनकी चमक कभी न डूबने वाले, कभी न टूटने वाले सितारों के समान है, जो दिन में, रात में अपनी आभा लिए झिलमि... Read More...