लोकतंत्र बचेगा तभी हम बचेंगे: (डॉ० नमिता सिंह)

ये समझा जाता रहा है कि पत्रकार जनता की धड़कन पहचानते हैं और उसे शब्द देते हैं। वे एक प्रकार से जनता के प्रतिनिधि बन कर सत्ता और समाज के बीच सेतु होते ह... Read More...

मौत के बाद भी आवाज़ ज़िंदा है, ‘गौरी लंकेश’: आलेख (आरिफा एविस)

इस तरह की हत्याओं का ये पहला मामला नहीं हैं. पहले भी आवाज उठाने वालों को मौत के घाट उतार दिया. दाभोलकर ,पनसारे ,कलबर्गी और गौरी लंकेश में एक ही चीज कॉ... Read More...

मासूम से राही मासूम रज़ा तक…: साक्षात्कार (हनीफ मदार)

राही मासूम रजा का नाम वर्तमान युवा वर्ग के बीच से उसी तरह गुमनाम होता जा रहा है जिस तरह प्रेमचन्द, त्रिलोचन शास्त्री, यशपाल, रांगेय राघव, नागार्जुन, म... Read More...

जन-गण-मन एवं अन्य कवितायें, स्मरण शेष (रमाशंकर यादव ‘विद्रोही)

3 जनवरी 1957 को फिरोज़पुर (सुल्तानपुर) उत्तरप्रदेश में जन्मे, रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हमारे बीच नहीं रहे ... जैसे जे एन यू खाली हो गया है... जैसे फक्क... Read More...

और’मुंशी’ प्रेमचंद’ बन गए: किस्सा, (सूरज प्रकाश)

31 जुलाई को कथा सम्राट प्रेमचंद की 137 वीं जयंती पर विशेष -  और'मुंशी' प्रेमचंद' बन गए   सूरज प्रकाश दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नही... Read More...

हरिशंकर परसाई को मेरा जानना और समझना: संस्मरण (ब्रजेश कानूनगो)

इंदौर से निकलने वाले 'नईदुनिया' अखबार का 70-80 कभी बड़ा महत्त्व हुआ करता था. बल्कि यह अखबार पत्रकारिता, साहित्यिक पत्रकारिता के स्कूल की तरह भी जाना जा... Read More...

’ए गुड-सेकेण्ड बॉय : संस्मरण (पद्मनाभ गौतम )

बाजार की एक पुरानी पुस्तकों की दुकान पर रद्दी में इन्द्रजाल चित्रकथा के अंग्रेजी संस्करण के सैकड़ों पुराने अंक मिल गए थे। अपने प्रिय पात्र फैण्टम, मैंण... Read More...

ए गुड सेकेण्ड बॉय : संस्मरण (पद्मनाभ गौतम)

हिन्दी की पुस्तकों के पीछे जैसे पागल था मैं! पुस्तक-महल से छपी पुस्तक ’संसार के 501 अद्भुत आश्चर्य’ जब बैकुण्ठपुर के बस-स्टैंड की पुस्तक-दुकान पर बिकन... Read More...

मेरा रुझान विजुअल आर्ट और लेखन दोनों के प्रति रहा है: “असग़र वजाहत” साक्षात्कार

अपनी किताब ‘असग़र वजाहत –चुनी हुई कहानियां' के पर एक चर्चा के लिए कानपुर आये लेखक डाक्टर असग़र वजाहत | वैसे कानपुर शहर उनके लिए अजनबी नहीं है । ननिहाल ह... Read More...

“हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ)

हमरंग पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या प... Read More...