और’मुंशी’ प्रेमचंद’ बन गए: किस्सा, (सूरज प्रकाश)

31 जुलाई को कथा सम्राट प्रेमचंद की 137 वीं जयंती पर विशेष -  और'मुंशी' प्रेमचंद' बन गए   सूरज प्रकाश दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नही... Read More...

हरिशंकर परसाई को मेरा जानना और समझना: संस्मरण (ब्रजेश कानूनगो)

इंदौर से निकलने वाले 'नईदुनिया' अखबार का 70-80 कभी बड़ा महत्त्व हुआ करता था. बल्कि यह अखबार पत्रकारिता, साहित्यिक पत्रकारिता के स्कूल की तरह भी जाना जा... Read More...

’ए गुड-सेकेण्ड बॉय : संस्मरण (पद्मनाभ गौतम )

बाजार की एक पुरानी पुस्तकों की दुकान पर रद्दी में इन्द्रजाल चित्रकथा के अंग्रेजी संस्करण के सैकड़ों पुराने अंक मिल गए थे। अपने प्रिय पात्र फैण्टम, मैंण... Read More...

ए गुड सेकेण्ड बॉय : संस्मरण (पद्मनाभ गौतम)

हिन्दी की पुस्तकों के पीछे जैसे पागल था मैं! पुस्तक-महल से छपी पुस्तक ’संसार के 501 अद्भुत आश्चर्य’ जब बैकुण्ठपुर के बस-स्टैंड की पुस्तक-दुकान पर बिकन... Read More...

मेरा रुझान विजुअल आर्ट और लेखन दोनों के प्रति रहा है: “असग़र वजाहत” साक्षात्कार

अपनी किताब ‘असग़र वजाहत –चुनी हुई कहानियां' के पर एक चर्चा के लिए कानपुर आये लेखक डाक्टर असग़र वजाहत | वैसे कानपुर शहर उनके लिए अजनबी नहीं है । ननिहाल ह... Read More...

“हमरंग” की टीम से एक खुशनुमा भेंट: (सीमा आरिफ)

हमरंग पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-छांट के, हर चौथे या प... Read More...

ब-यादे रोहित वेमुला: स्मरण आलेख (जीवेश प्रभाकर)

"जाने कब समाज को बदल डालने की तमन्ना लिए एक युवा अचानक मानो हमारे मुंह पर थूकता हुआ दूसरे जहाँ को चला जाता है । मानो कह रहा हो कि तुम्हारी है तुम ही स... Read More...

रमणिका फांउडेशन और दलित लेखक संघ की काव्य-गोष्ठी: रिपोर्ट (सुमन कुमारी)

प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को रमणिका फांउडेशन और भारतीय दलित लेखक  संघ के संयुक्त तत्वाधान में काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में हर ब... Read More...

जश्न-ए-रेख्ता 2016: रिपोर्ट (सीमा आरिफ)

जश्न-ए-रेख्ता जलसे का आयोजन पिछले दो सालों से दिल्ली में किया जा रहा है.इस बार इस कार्यक्रम का आयोजन 12-14 फरवरी २०१६ को इंदिरा गांधी राष्टीय कला केंद... Read More...

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं: हृषिकेश सुलभ

एक रचनाकार को उसकी रचनाएं जीवित रखती हैं पुरस्कार नहीं:  15 फरवरी 1955 को बिहार के सीवान जिले के लहेजी ग्राम में स्वतंत्रता सेनानी रमाशंकर श्रीवास्तव... Read More...