सुसाइड नोट: ‘बस मरना ही हमारे हिस्से है.. (विनय सुल्तान)

सुसाइड नोट: ‘बस मरना ही हमारे हिस्से है.. साभार गूगल (तीसरी क़िस्त) हमारे जेहन में हर शब्द के साथ एक या अधिक छवियां जुड़ी होती हैं. मसलन बुंदेलखंड नाम ... Read More...

वाया बनारस अर्थात् फिसल पड़े तो हर गंगे: यात्रावृतांत

विकास या विकास की गति को शब्दों में, किसी सपनीली दुनिया की तरह, अपनी कल्पनाओं की उड़ान से भी एक कदम आगे के स्वरूप का वर्णन कर लें किन्तु यथार्थ के धरात... Read More...

साहित्यिक वैचारिकी को आगे बढ़ाने का सगल, ‘हमरंग’: (डॉ. मोहसिन ख़ान ‘तनहा’)

हमरंग के दो वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-... Read More...

‘किताबों के प्रति दीवानगी’ पटना पुस्तक मेला 2015: (रविशंकर)

एक ऐसे समय में जब चारों तरफ़ बाज़ार का शोर अपने चरम पर है, और एक से बढकर एक मंहगी और विलासी चीज़ों का प्रलोभन दे, लोगों के मन पर हमले कर रहा है ! शहर के ... Read More...

कैसा है इंतिज़ार हुसैन का भारत: साक्षात्कार (मिर्ज़ा ए. बी. बेग)

७ दिसंबर १९२३ को डिवाई बुलंदशहर, भारत में जन्मे इंतज़ार हुसैन पाकिस्तान के अग्रणी कथाकारों में से थे | वे भारत पाकिस्तान के सम्मिलित उर्दू कथा साहित्य... Read More...

मरना कोई हार नहीं होती: संस्मरण (हरिशंकर परसाई)

प्रमोद मैं और शान्ता भाभी तथा रमेश से सलाह करने दूसरे कमरे में चले गये।इधर मुक्तिबोध ज्ञानरंजन से नये प्रकाशनों पर बात करने लगे। तय हुआ कि जल्दी भोपा... Read More...

किसने बिगाड़ा मुझे: आत्मकथ्य (प्रो० विजय शर्मा)

यूं तो इंसानी व्यक्तित्व के बनने बिगड़ने में हमारे सामाजिक परिवेश की बड़ी भूमिका होती है किन्तु इस बिगड़ने "इंसान बनने" के लिए सामाजिक असमानताओं और विषमत... Read More...
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‘हमरंग’ की निरंतरता आश्वस्त करती है ! (प्रो0 विजय शर्मा)

हमरंग का एक वर्ष पूरा होने पर देश भर के कई लेखकों से ‘हमरंग’ का साहित्यिक, वैचारिक मूल्यांकन करती टिपण्णी (लेख) हमें प्राप्त हुए हैं जो बिना किसी काट-... Read More...

विज्ञान और कला का समागम, विज्ञान प्रदर्शनी: रिपोर्ट (अनिता)

"अब मैं उस बच्चे के प्रोजेक्ट के पास खडी थी जिसका नाम था “जीवन में गणित की भूमिका” (role of  mathemathics in life ) मेरे बिना पूछे ही इन छात्रों ने अप... Read More...

तीन शब्द-चित्र : प्रतिभा

(किसी  लेखक  की भाषा जब भावनाओं को आकार देने लगे और पाठक से संवाद  का  रिश्ता कायम कर ले तब  उस लेखक को और-और लिखना चाहिए...क्योंकि भाषा अपनी ताकत के ... Read More...