पुरस्कार वापसी का अर्थ : रिपोर्ट (मंडलेश डबराल)

पुरस्कार वापसी का अर्थ मंडलेश डबराल साहित्य अकादेमी ने अगर अगस्त में कन्नड़ वचन साहित्य के विद्वान् एमएम कलबुर्गी की बर्बर हत्या की कड़े शब्दों में न... Read More...

बच्चों को कम न आंके : नाट्य रिपोर्ट (शिवम् राय)

बच्चों को कम न आंके शिवम् राय भारतेन्दु नाट्य अकादमी ‘रंगमण्डल’ लखनऊ के द्वारा हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी एक माह की ‘बाल रंगमंच कार्यशाला’ की गयी।... Read More...

प्रो. लाल बहादुर वर्मा को प्रथम शारदा देवी शिक्षक सम्मान, संध्या नवोदिता

20 दिसम्बर| इलाहाबाद संग्रहालय में रविवार को शारदा देवी ट्रस्ट की ओर से प्रथम शारदा देवी शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया| जाने माने इतिहासकार, ... Read More...

तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा:

३१ जुलाई २०१६ को सुर-सम्राट मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर पटना में आयोजित कार्यक्रम से 'अनीश अंकुर' ...... तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा, इंसान की औला... Read More...

मुक्तिबोध, संघर्ष और रचनाशीलता : अनीश अंकुर

प्रख्यात कवि आलोकधन्वा ने हरिशंकर परसाई के साथ के अपने संस्मरणों को सुनाते हुए कहा " एक बार मैंने हरिशंकर परसाई से पूछा कि आप सबसे अधिक प्रभावित किससे... Read More...

एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो0 यशपाल : अनीश अंकुर

 श्रद्धांजलि सभा  आयोजन  एक्टीविस्ट वैज्ञानिक थे प्रो यशपाल " प्रोo यशपाल इस बात की चिंता करते थे कि भारत की जनता और विज्ञान को कैसे जोड़ा जाए और इस ... Read More...

हमारे समय में कविता: रिपोर्ट (अन्तरिक्ष शर्मा)

हर वर्ष की भांति एक जनवरी २०१६ को कोवैलैंट ग्रुप ने अपना स्थापना दिवस अनूठे तथा रचनात्मक ढंग से उन युवा और किशोर प्रतिभाओं के साथ  मनाया |जिनकी सामाजि... Read More...

जिस लाहौर नई वेख्या ओ जन्म्या ई नई उर्फ़ माई… : नाट्य समीक्षा (शक्ति प्रकाश )

दो दिवसीय नाटक 'माई' (जिस लाहौर नहीं वेख्या ...) का  सफलता पूर्वक मंचन ........ | जिस लाहौर नई वेख्या ओ जन्म्या ई नई उर्फ़ माई... शक्ति प्रकाश कल... Read More...

शेक्सपीयर मन के रचनाकार हैं: एक रिपोर्ट, (राजन कुमार सिंह)

शेक्सपियर ऐसे नाटककार थे जिन्हें आलोचकों ने भी माना कि वो वाकई में महान थे। अदृश्य को जानने की शक्ति कलाकार को महान बनाती है। वे अपने नाटकों के चरित्र... Read More...

झोपड़पट्टी: नाटक (राजेश कुमार)

'राजेश कुमार' ऐसे इकलौते हिंदी नाटककार हैं जो निरंतरता में ऐसे नाट्यालेखों को लिख रहे हैं जो यथा स्थिति ही बयान नहीं करते बल्कि वे एक चेतना भी पैदा कर... Read More...