नाट्य लेखन का कृत्रिम संकट: आलेख (राजेश कुमार)

जो लोग छाती पीट-पीट कर आज नाटक न लिखे जाने को रोना रोते हैं, वे आजादी के बाद धर्मवीर भारती और मोहन रोकष से आगे बढ़ ही नहीं पाते। उनकी सूई उन्हीं तक अट... Read More...

दलित साहित्य के पुरोहित: आलेख (ओमप्रकाश वाल्मीकि)

बात पुरानी॰॰॰॰ आश नई  दलित साहित्य में आत्मकथाओं ने जिस वातावरण का निर्माण किया है। वह अद्भुत है। जिसे चाहे विद्वान आलोचक जो कहें, लेकिन दलित जीवन की... Read More...

नाक के नीचे : आलेख (रूपाली सिन्हा )

समय बीतने के साथ मेरी नाक के नीचे इतनी चीज़ें इकट्ठी हो गयी थीं कि अब देखने में मुश्किल होने लगी थी। आहिस्ता आहिस्ता मानो नज़र धुंधली पड़ने लगी थी और ज़बा... Read More...

विश्वविद्यालयों की ‘धंधेबाज़ी’ की नई तैयारी !

(विश्वविद्यालयी व्यवस्था पर अगर प्रस्तावित बदलाव लागू हुए तो किस किस्म की समस्याएं खड़ी होंगी...... भारतीय शिक्षा व्यवस्था और युवा पीढी के भविष्य को ल... Read More...

ग्लोबल गांव में रंगकर्म पर संकट: आलेख (राजेश कुमार)

मौजूदा जो हालात है उसमें रंगमंच को विकेन्द्रित करना ही होगा। रंगमंच की स्थानीयता को पहचान देनी होगी। इसके कथ्य और रंगकर्म को सम्मान देना होगा क्योंकि ... Read More...

आवाज़ों के घेरे : आलेख (डा0 मोहसिन खान ‘तनहा’)

सामाजिक और राजनैतिक, वैचारिक समानता और द्वन्द के बीच साहित्य से लालित्य और भारतीय संस्कृति के लोक रंग कहीं विरक्त हो रहे हैं | निसंकोच साहित्य की सार्... Read More...

हवा हवाई है हमारा यह अंध राष्ट्रवाद : आलेख (पलाश विस्वास)

"हमें मुल्क की परवाह हो न हो, इस मुल्क के लोगों की परवाह हो न हो, हमें सरहद और देश के नक्शे की बहुत परवाह है। हमें इस देश की जनता की रोजमर्रे की बुनिय... Read More...

राजा रवि वर्मा: दो फ़िल्में, दो नजरिए : फिल्म समीक्षा (प्रो० विजय शर्मा)

"जब कलाकार और उसकी कृतियों की कहानी किसी दूसरे कैनवस पर उकेरी जाती है तो वहाँ बहुत कुछ बदल जाती है। सच्चाई और कल्पना का मिश्रण एक नई कृति रचता है। यही... Read More...

वर्तमान सांस्कृतिक परिदृष्य में रंगकर्म की चुनौतियाँ: आलेख (राजेश कुमार)

लेखक और कलाकार आम जनता से अलग-थलग होने लगे। एकांकी जीवन व्यतीत करने लगे। सामूहिकता व्यक्तिवाद में तब्दील होने लगा। मुगालते में रहने लगे कि जनता के बीच... Read More...

पश्चिमी नारीवाद की अवधारणा और विभिन्न नारीवादी आंदोलन :आलेख (डा0 नमिता सिंह)

"स्त्रियों की अंधेरी दुनियां में रोशनी के प्रवेश की, घर-परिवार की चारदीवारी के भीतर सामाजिक-धार्मिक बंधनों में जकड़ी स्त्री मुक्ति की कहानी लगभग अठारह... Read More...