हिन्दी के प्रयोग में सोशल मीडिया की भूमिका : आलेख (ब्रजेश कानूनगो )

ऐसे में सोशल मीडिया अपने तमाम खतरों और अतिवादी प्रकृति के बावजूद भाषा विशेषकर हिन्दी और हिन्दी साहित्य के प्रसार में बहुत मददगार हो सकता है. हुआ भी है... Read More...

सामाजिक व्यवस्था का केन्द्र परिवार: आलेख (आशीष मिश्र)

सृजन और सृजनात्मकता की सार्थकता इससे और भी बढ़ जाती है जब पाठक उसे पढ़ते हुए लेखकीय परिकल्पना से एक कदम आगे जा कर उसे सोचने, समझने और मूल्यांकन करने को ... Read More...

कभी फ्रांस का प्यारा था ISIS: आलेख (सुरेश ऋषि)

पेरिस हमले को दुनिया के किसी तर्क से सही साबित नहीं किया जा सकता है लेकिन ईराक-सीरिया में भूमिका को लेकर खुद फ्रांस सरकार भी कठघरे में है।  अपने नागरि... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: आठवीं क़िस्त (नमिता सिंह)

1917 में ऐनी बेसेंट (जो होमरुल लीग की संस्थापकों में थी) उन्होंने मार्गेट कूजिंस, सरोजनी नायडू समेत अन्य अनेक कांग्रेसी महिलाओं के साथ स्त्रियों के वो... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान: सातवीं क़िस्त (नमिता सिंह)

योरोप के नवजागरण के विपरीत भारत में नयी चेतना और विचारों का परिदृश्य एकदम भिन्न था। प्रारंभिक अवस्था में यह समाज सुधार आंदोलन थे जिन्होंने बंदिनी अवस्... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान : आलेख ‘नवीं क़िस्त’ ( नमिता सिंह)

राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न कार्यक्रमों के नेतृत्व में हिन्दू स्त्रियों के अलावा मुस्लिम, पारसी और मार्गरेट कूजीन्स व ऐनी बेसेंट जैसी विदेशी महिलाएँ भ... Read More...

स्त्री आंदोलन-इतिहास और वर्तमान : आलेख ‘दसवीं और अंतिम क़िस्त ( नमिता सिंह)

"1997 में सर्वोच्च न्यायालय ने भंवरी देवी केस के प्रकाश में कामकाजी महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने हेतु कार्यस्थल के लिये जारी निर्देशों का पालन अनि... Read More...

प्रेमचंद और सिनेमा: आलेख (प्रो०विजय शर्मा)

प्रेमचंद के १३७ वें जन्मदिवस पर विशेष - (यह सिनेमा का शुरुआती दौर था। प्रेमचंद की निगाह इस विधा पर थी। तीस के दशक में उन्होंने सिनेमा पर अपनी चिंताओं... Read More...

साहित्य में स्त्राी सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ, “भाग १” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

आज स्त्री-लेखन साहित्यिक चर्चा में एक मुख्य विषय है। समकालीन स्त्री रचनाकारों ने ऐतिहासिक-सामाजिक विकास क्रम की स्थितियों में बड़ी सीमा तक संविधान-प्रद... Read More...

साहित्य में स्त्री सर्जनात्मकता: ऐतिहासिक संदर्भ: “भाग २” आलेख (डॉ० नमिता सिंह)

"आधुनिक ज्ञान एक शक्ति है। उससे लैस होकर पुरुष खुद को शक्तिशाली बनाना चाहते थे, और स्त्रियों को कमज़ोर ही रखना चाहते थे। अपने इस स्वार्थ को पुरुष सुधार... Read More...